अनजानों की तरह मिले और उल्फत सी हो गयी, दो अजनबी ऐसे मिले कि दोस्ती हो गयी।

तन्हा शायरियाँ :मेरे अंदर ये कैसी बेबसी और तन्हाई है

इश्क कोई गुनाह नहीं होता,

फिर क्यों ये दिल है रोता,

ये कैसी मोहब्बत करने की सजा पाई है,

मेरे अंदर ये कैसी बेबसी और तन्हाई है।

अनजानों की तरह मिले और उल्फत सी हो गयी,

दो अजनबी ऐसे मिले कि दोस्ती हो गयी।

सच्ची दोस्ती करने का इरादा था उनसे,

पर हमें तो उनसे सच्ची मोहब्बत ही हो गयी।

जानते हैं वो फिर भी अनजान बनते हैं,

इसी तरह वो हमें परेशान करते हैं।

पूछते है हमसे की आपको क्या पसंद हैं,

खुद जवाब होकर सवाल करते हैं।


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