इंसान खुद की नजर में सही होना चाहिए, दुनिया तो भगवान से भी दुखी है।

इतना कड़वा मत बनो कि लोग थूक दें, पर इतना भी मीठा मत बनो कि लोग तुम्हे निगल जायें। आदमी धन के पीछे तब तक भागता है, जब तक कि उसका ‘निधन’ नहीं हो जाता। “पंचतत्व” के बने शरीर के “पंचतत्व” में विलीन होने पर दुःख कैसा ,घर जाने वाला पथिक मार्ग में मिलने वाले का साथ छोड़ ही जाता है

उम्र बस बुजुर्ग करती है सबक तो जिन्दगी देती है।

कामयाब व्यक्ति अपने चेहरे पर दो ही चीजे रखते है – मुस्कराहट और खामोशी। मुस्कराहट – मसले को हल करने के लिए और ख़ामोशी – मसलो से दूर रहने के लिए |

इंसान खुद की नजर में सही होना चाहिए, दुनिया तो भगवान से भी दुखी है। सम्पत्ति उपार्जन कीजिये पर किसी उद्देश्य से न कि मधु मक्खियों की तरह कष्ट सहने के लिए। यदि पुराने वस्त्रों को उतार कर,नये वस्त्र पहनना सुखकर लगता है तो फिर पुराने शरीर से आत्मा के जाने पर दुःख कैसा। इतना अहंकार ना कर अपने किस्मत पर क्योकि शमशान ऐसे लोगो की राख से भरा पड़ा है, जो समझते थे कि दुनिया उनके बिना चल नहीं सकती।

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