ईमानदारी के लिए किसी छाप वेशभूषा या श्रृंगार की जरूरत नहीं होती, सादगी अपनाए

जब परिस्थितिया बदल जाती है,

तो रणनीति बदलने में कोई बुराई नहीं है।

अपना सर्वश्रेष्ठ करे, वर्तमान का मजा ले और जो है उसमे खुश रहे।

काम करने में कोई अपमान नहीं है,

अपमान तो खाली बैठने में है।

नाकामिया आपको अपनी गलती सुधारने और,

वापस दोगुनी ताकत से सफल होने के लिए प्रेरित करती है।

किसी प्रतियोगिता में जितने से नहीं, बल्कि

इसके लिए की जाने वाली घंटो, महीनों की तैयारी से विजेता बनते है।

हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है,

मान लिया तो हार और ठान लिया तो जीत।

जब हम वह कर लेते है, जिससे हम डरते है,

तभी हमारे अंदर निडरता का जन्म होता है।

ईमानदारी के लिए किसी छाप वेशभूषा

या श्रृंगार की जरूरत नहीं होती, सादगी अपनाए।

वह मायने नही रखता की गलत रास्ते पर आप कितनी दूर चले गए है,

वापस मुड़ने की संभावना तो हमेशा ही है।

असली बहादुरी तो तब है जब आप वह करे जो सही है।

भले ही वह लोगो में ज्यादा लोकप्रिय न हो।

अगर आप बोलेंगे तो जानी हुई बातें ही दोहराएंगे

पर सुनने पर कुछ नया सीखेंगे।

मनुष्य ही दुनिया का एकमात्र ऐसा प्राणी है,

जिसे हंसने का गुण प्रदान किया गया है।

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