उपरवाला कर्म देखता है, वसीयत नही

उपरवाला कर्म देखता है, वसीयत नही – जय श्री कृष्णा

सुलझा हुआ मनुष्य वह है, जो अपने निर्णय स्वयं करता है और उन निर्णयो के परिणाम के लिए किसी दूसरे को दोष नही देता। आगे बढ़ने वाला व्यक्ति कभी किसी को बाधा नहीं पहुंचाता और दूसरों को बाधा पहुंचाने वाला व्यक्ति कभी आगे नहीं बढ़ता।

कोई अगर आपके अच्छे कार्य पर सन्देह करता है तो करने देना, क्योकि शक़, सदा सोने की शुद्धता पर किया जाता है कोयले की कालिख पर नही।

रोने से तो आंसू भी पराये हो जाते हैं लेकिन मुस्कुराने से पराये भी अपने हो जाते हैं। मुझे वो रिश्ते पसंद है जिनमें मैं नहीं हम हो , इंसानियत दिल में होती है, हैसियत में नही,उपरवाला कर्म देखता है, वसीयत नही।

प्रिय मित्र आपको यह आर्टिकल पसन्द आया हो तो Comments जरूर कीजिएगा। दिल से बहुत बहुत शुक्रिया मेरे प्रिय मित्र। बजरंगबली सब मनोकामना पूर्ण करें, उनका स्नेह आपको और आपके सारे परिवार को सदैव मिले।:):):)

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