कुछ फुरसत के पल निकालिये, कभी खुद से भी ला कीजिये

बोलने से पहले सोचें और फिर बोलें

किसी ने क्या खूब कहा है “न चादर बड़ी कीजिये, न ख्वाहिशें दफन कीजिये, चार दिन की ज़िन्दगी है, बस चैन से बसर कीजिये… न परेशान किसी को कीजिये, न हैरान किसी को कीजिये, कोई लाख गलत भी बोले, बस मुस्कुरा कर छोड़ दीजिये… न रूठा किसी से कीजिये, न झूठा वादा किसी से कीजिये, कुछ फुरसत के पल निकालिये, कभी खुद से भी मिला कीजिये” I

अक्सर आपके मुँह से कोई ऐसी बात निकल जाती है जो आप बोलना नहीं चाहते थे। उसके बाद आपको पछताना ही पड़ता है। हमारे द्वारा बोली बातें उस तीर की तरह होती है जो एक बार कमान से निकल जाये तो उसे हम वापिस नहीं ले सकते। इसका कारण है ‘सोच कर न बोलना’। ज्यादातर लोग अपनी बातों को तोल कर नहीं बोलते। पहले बोल देते हैं और बाद में सोचते हैं। इसके कई दुखद परिणाम भी होते हैं। Happy and Successful Life के लिए यह बहुत जरूरी है की हम बोलने से पहले सोचें और फिर बोलें।

जब आप ऐसा करते हैं तो आपको अपनी बातों को तोलना आ जाता है। आप सोच सकते हैं की ‘सामने वाले को मेरी बात से बुरा तो नहीं लगेगा, या इस बात से मुझे कोई नुकसान तो नहीं होगा, या इस बात से हमारे आपसी संबंध बिगड़ेंगे तो नहीं ‘। शुरू शुरू में आपको समय लगेगा पर जब आप ऐसा बार बार करेंगे तो आप जल्दी सोच कर बोल पाएंगे।

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