घर गुलज़ार, सूने शहर,बस्ती बस्ती में कैद हर हस्ती हो गई,आज फिर ज़िन्दगी महँगी और दौलत सस्ती हो गई

जिंदगी आपकी है,मायने भी आप तय करें

जब तक “किस्मत” का “सिक्का” “हवा” में है, तब तक “खुद” के बारे में “फैसला” कर लीजिए क्योंकि जब वो “सिक्का” नीचे आएगा, तो वह अपना “फैसला” खुद सुनाएगा। दूसरों को दण्‍ड देना सहज है, किन्‍तु उन्‍हें क्षमा करना और उनकी भूल सुधारना अत्‍यधिक कठिन कार्य है। वह पुरूष धन्‍य है जो काम करने में कभी पीछे नहीं हटता, भाग्‍यलक्ष्‍मी उसके घर की राह पूछती हुई चली आती है। पीड़ा से दृष्टि मिलती है, इसलिए आत्मपीड़न ही आत्मदर्शन का माध्यम है।

घर गुलज़ार, सूने शहर,बस्ती बस्ती में कैद हर हस्ती हो गई,आज फिर ज़िन्दगी महँगी और दौलत सस्ती हो गई । अभिमान तब आता है जब हमे लगता है हमने कुछ काम किया है और सम्मान तब मिलता है जब दुनिया को लगता है, कि आप ने कुछ महत्वपूर्ण काम किया है जो दूसरों को इज़्ज़त देता है असल में वो खुद इज़्ज़तदार होता है क्योकि इंसान दूसरो को वही दे पाता है जो उसके पास होता है।

“व्यवहार” घर का शुभ कलश हैऔर “इंसानियत” घर की “तिजोरी”, “मधुर वाणी” घर की “धन-दौलत” है और “शांति” घर की “महालक्ष्मी”। “पैसा” घर का “मेहमान” है और “एकता” घर की “ममता। “व्यवस्था” घर की “शोभा” है और समाधान “सच्चा सुख”। सुंदर “शरीर” में गंदा “मन” सोने की “थाली” मे “लोहे” की “कील” के समान है, जो धीरे-धीरे अपने “जंग” द्वारा पूरी “सोने” की “थाली” को “नष्ट” कर देता है। जिंदगी आपकी है,मायने भी आप तय करें।

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