जिंदगी में इतनी तेज़ी से आगे दौड़ें की लोगों के, बुराई के धागे आपके पैरों में आकर ही टूट जाएँ

कभी भी जीवन पूर्व निर्धारित नहीं हो सकता।

सब कुछ वैसा नहीं हो सकता जैसा आप चाहते हैं।

सोचिए सब कुछ वैसा हो जाये जैसा सब चाहते हैं तो जीवन कैसा होगा। यदि

जीवन की भविष्वाणी पहले से ही हो जाये तो,

इस जीवन में बिलकुल भी आनंद नहीं होगा।

यानि जीवन बिलकुल नीरस हो जायेगा।

जीवन में जब आप कामियाबी के रास्ते पर चलते है,

प्रशंसा के साथ साथ कुछ लोगों की आलोचना का सामना भी करना पड़ता है।

न तो आप प्रशंसा से आकर्षित हो और न ही आलोचना से दुखी।

जिंदगी में इतनी तेज़ी से आगे दौड़ें की लोगों के,

बुराई के धागे आपके पैरों में आकर ही टूट जाएँ।

भीतर से चमकने वाली रोशनी को कुछ भी धुंधला नहीं कर सकता।

जीवन साइकिल चलाने जैसा है।

अपना संतुलन बनाये रखने आपको अवश्य ही चलते रहना चाहिए।

यदि आप रुके तो गिर जायेंगे।

जिस प्रकार रुके हुए पानी मे काई लगने लगती है,

उसी प्रकार ठहरे हुए जीवन में भी काई लगने लगती है।

जब तक जीवन है चलते रहें।

याद रखिये, जीवन में आपको वो नहीं मिलता जो आपको चाहियें।

जीवन में आपको वो मिलता है तो आपको चाहियें ही चाहियें।

आप जीवन में वही पाते हैं जो आपमें मांगने का साहस है।

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