वैज्ञानिकों को 3D होलोग्राम की तरह लग रहे हैं ब्लैकहोल, जानें इसके पीछे का कारण

Black Hole की पहली तस्वीर खोलेगी ...

आमतौर पर ब्लैकहोल (Black Hole) दिखाई नहीं देते. कहा जाता है कि उनमें गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादा होता है कि वे प्रकाश तक को अपने अंदर खींच लेते हैं. इसी लिए प्रकाश या किसी भी तरह की विद्युतचुंबकीय तरंग उससे हम तक नहीं पहुंच पाती है. हमें जो भी उनके बारे में पता चल सका है, वह उनके आसपास हुई घटनाओं के कारण पता चल सका है, लेकिन एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि ब्लैकहोल 3D होलोग्राम की तरह क्यों दिखते हैं.

क्या कहा गया है शोध में
पिछले साल ही दुनिया को ब्लैकहोल की पहली तस्वीर उपलब्ध हो सकी थी. लेकिन इस शोध के मुताबिक वैज्ञानिकों को लगता है कि जो हमें एक ब्लैकहोल की तरह दिखाई देता है, वह वास्तव में एक 3डी होलोग्राम की तरह का वर्णन हो सकता है. ब्लैकहोल के आसपास से आने वाली रोशनी से ही उसका आभास होता है. उसकी सीमाओं पर होने वाली घटनाएं ही उसके बारे में जानकारी देती हैं.

सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत में टकराव

इस सिद्धांत को एक वजह से और बल मिल रहा है. यह ब्लैकहोल को लेकर आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत (Theory of Relativity) और क्वांटम सिद्धांत (Quantum mechanics) में मतांतर  को दूर करता दिखता है. जहां सापेक्षता का सिद्धांत ब्लैकहोल को एक बिना जानकारी वाली सरल वस्तु (Simple object) बताता है. तो वही क्वांटम भौतिकी की राय अलग है. जैकब बेकनस्टीन और स्टीवन हॉकिन्स का दावा है कि क्वांटम भौतकी के अनुसार ब्लैकहोल बहुत ही जटिल सिस्टम होते हैं. उनमें जटिलता बहुत ज्यादा होने का मतलब होता है की उनमें अत्यधिक एंट्रॉपी (Entropy) होती है.  इसीलिए उनमें बहुत ही ज्यादा जानकारी होनी चाहिए.अब यह शोध क्या कह रहा है
फिजिकल रीव्यू में प्रकाशित इस शोध में सुझाया गया है कि हेलोग्राम की तरह ही ब्लैकहोल की सारी जानकारी एक दो आयामीय (2D) सतह पर जमा हो जाती है जो एक त्रिआयामीय (3D) तस्वीर की तरह दिखती है. इस तरह के खगोलीय पिंडों की पुष्टि क्वांटम थ्योरी से होती है. ये अपने अंदर दो आयामों में ही बहुत सी जटिल जानकारी समेटे होते हैं और बहुत ही जटिल होते हैं. हैरानी की बात यह है कि यह धारणा महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन की थ्योरी ऑफ जनरल रिलेटिविटी यानि कि सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत से मेल खाती है. इस सिद्धांत के मुताबिक ब्लैक होल सरल, गोलाकार, त्रिआयामी (3D) होते हैं. ऐसा ही कुछ पिछले साल जारी इनकी पहली तस्वीर में भी दिखाई दिया था.तीस साल पुराने सिद्धांत के आधार पर दिया यह सिद्धांतइटली के शोधकर्ता  फ्रांसिसको बेनिनी और पाओलो मिलान इस नई थ्योरी को बनाया है. उन्होंने इस सिद्धांत को 30 साल पुराने होलोग्राफिक सिद्धांत के आधार पर बनाया है. उनका कहना है कि यह सिद्धांत बताता है कि गुरुत्व के एक स्पेस के क्षेत्र में बर्ताव की दूसरे तरीकों से भी व्याख्या की जा सकती है. यह बर्ताव उस क्षेत्र के केवल किनारे पर स्थित है और इसमें एक आयाम  (Dimension) कम होगा. शोधकर्ताओं का दूसरे तरीके मतलब होलोग्राफ व्याख्या से ही है. इसमें गुरुत्व स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती.

एक आयाम के हटने से हो सकती है आसानी
शोधकर्ताओं के अनुसार इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि इस सिद्धांत से गुरुत्व की व्याख्या ऐसी भाषा के माध्यम से हो रही है जिसमें गुरुत्व शब्द ही नहीं होता. इससे उसका क्वांटम मैकेनिक्स से टकराव नहीं होता. शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह होलोग्राम दो आयामों में ही तीन आयाम की जानकारी दे देता है उसी तरह से ब्लैकहोल के बारे में भी जानकारी मिल सकती है. शोधकर्ताओं ने इस सिद्धांत को ब्लैकहोल पर लागू किया है. उनका कहना है  कि ब्लैकहोल के दो आयाम हैं, जहां गुरुत्व गायब हो जाता है, लेकिन वे त्रिआयामी वस्तु पैदा करते हैं.ब्लैकहोल की जटिलता समझने में पहला कदम
यह एक तरह से सामान्य सापेक्षता और क्वांटम मैकेनिक्स के बीच टकराव से बचता सिद्धांत लगता है, लेकिन शोधकर्ताओं का लगता है कि यह इन रहस्मयी वस्तुओं को गहराई से समझने के लिए पहला कदम हो सकता है. और इससे यह भी पता चल सकता है कि क्या होता है जब क्वांटम मैकेनिक्स सामान्य सापेक्षता से आगे जाती है.

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