सुई में वही धागा प्रवेश कर सकता है, जिस धागे में कोई गांठ नहीं हो

प्रशंसा की भूख अयोग्यता की परिचायक है।

काबिलियत की तारीफ तो विरोधियों के भी दिल से निकलती है।

जिन्दगी में सबसे ज्यादा दुःख,

दिल टूटने पर नहीं यक़ीन टूटने पर होता है !!

हम परेशान क्यों है दो ही कारण है।

एक हमे तकदीर से ज्यादा चाहिये, और दूसरा

हमे वक़्त से पहले चाहिये हर।

कर्म वो फसल है जिसे इंसान को हर हाल में काटना ही पड़ता है, इसलिए

हमेशा अच्छे बीज बोये ताकि फसल अच्छी हो।

घड़ी को देखो मत, बल्कि वो करो जो घड़ी करती है,

बस चलते रहो।

सच्चाई और अच्छाई की तलाश में पूरी दुनियाँ घूम ले, अगर

वो हमारे अंदर नही है तो कहीं नहीं है।

अंधे को मंदिर आया देखकर लोग हंसकर बोले की,

मंदिर में दर्शन के लिए आये तो हो पर,

क्या भगवान् को देख पाओगे ?

अंधे ने मुस्कुरा के कहा की क्या फर्क पड़ता है,

मेरा भगवान तो मुझे देख लेगा।

द्रष्टि नहीं द्रष्टिकोण सही होना चाहिए !!

किसी को अपना बनाओ तो “दिल” से बनाओ,

“जुबान” से नहीं और किसी पर गुस्सा करो तो,

“जुबान” से करो “दिल” से नही क्योंकि,

सुई में वही धागा प्रवेश कर सकता है,

जिस धागे में कोई गांठ नहीं हो।

सुप्रभात *ॐ* आपका दिन शुभ व मंगलमय हो!!

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