. हमें कुछ पता नहीं है हम क्यों बहक रहे हैं, रातें सुलग रही हैं दिन भी दहक रहे हैं

1. तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के, दिल के बाजार में बैठे है खसारा कर के।

2. यादों में रहे यह एहसास रखना नजरों से दूर ही सही दिल के पास रखना, यह नहीं कहते की पास रहो दूर ही सही पर याद रखना।

तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के, दिल के बाजार में बैठे है खसारा कर के

3. हमें कुछ पता नहीं है हम क्यों बहक रहे हैं, रातें सुलग रही हैं दिन भी दहक रहे हैं, जब से है तुमको देखा हम इतना जानते हैं, तुम भी महक रहे हो हम भी महक रहे हैं।

4. फिर हुआ यूं हम दोनों बात करने से डरने लगे, मुझे मोहब्ब्त हो गई थी इस लिए, और उसको मोहब्बत हो ना जाए इसलिए।

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