क्या अपने क्रेडिट कार्ड का बैलेंस जीरो रखते हैं? बैंक बंद कर सकता है खाता, जान लीजिए इसका बड़ा नुकसान

 क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो अपने क्रेडिट कार्ड का बैलेंस जीरो रखते हैं? अगर ऐसा है तो इसके नुकसान के बारे में भी जान लीजिए. अगर क्रेडिट कार्ड का बैलेंस जीरो रखते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर निगेटिव में जा सकता है और आगे चलकर लोन आदि लेने में दिक्कत हो सकती है. इससे बचने का यही उपाय है कि बैलेंस और इस्तेमाल के बारे में जागरूक रहें. लोग भले ही क्रेडिट कार्ड रखते हैं और उसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उन्हें क्रेडिट स्कोर और उसके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं होती. क्या करें कि क्रेडिट स्कोर निगेटिव में न जाए. इसमें क्रेडिट कार्ड का बैलेंस बहुत बड़ा रोल निभाता है. यह भी पता होना चाहिए कि अपने क्रेडिट कार्ड का स्कोर कितना रखें कि ऑटो लोन या पर्सनल लोन लेने में आगे चलकर कोई दिक्कत न हो.

आइए जानते हैं कि क्रेडिट कार्ड का जीरो बैलेंस आपको किस तरह से कितना प्रभावित करता है. यह स्थिति तब पनपती है जब आप क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट खर्च कर देते हैं और महीने के अंत में बैलेंस जीरो हो जाता है. यह आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करता है क्योंकि इससे पता चलता है कि कार्ड होल्डर बहुत ज्यादा खर्चीला है और उसे खर्च का प्रबंधन करने नहीं आता. जीरो बैलेंस का मतलब ये भी होता है कि क्रेडिट कार्ड का अकाउंट इनएक्टिव हो सकता है. यह आपके क्रेडिट हेल्थ पर बड़ा गंभीर असर डाल सकता है. जीरो बैलेंस होने से रिवॉल्विंग यूटिलाइजेशन रेश्यो कम होता है. इससे पता चलता है कि कार्ड होल्डर किसी वित्तीय परेशानी से जूझ रहा है.

बैलेंस जीरो होने पर क्या होता है

क्रेडिट कार्ड का बैलेंस जैसे ही जीरो होता है, बैंक आपकी क्रेडिट लिमिट घटाने के बारे में सोचने लगते हैं. बैंक को लगता है कि कार्डहोल्डर आगे चलकर डिफॉल्ट साबित हो सकता है. क्रेडिट लिमिट घटने पर क्रेडिट स्कोर अपने आप कम होने लगता है. यह क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो के चलते होता है. क्रेडिट स्कोरिंग एजेंसियां क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो तय करती हैं जिससे कार्डहोल्डर के लोन लेने या क्रेडिट लेने के बारे में पता चलता है. क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो अगर 30 परसेंट है तो उसे सही माना जाता है. यानी कि अगर क्रेडिट लिमिट 1 लाख रुपये है तो आप हर महीने 30,000 रुपये क्रेडिट करें तो चलेगा. इससे ऊपर जाने पर क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है. पूरी क्रेडिट लिमिट से अगर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो 30 परसेंट से कम रहे तो क्रेडिट स्कोर में सुधार देखा जाता है.

क्रेडिट स्कोर में क्या देखा जाता है

  • अगर आप एक बार में क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल चुका देते हैं तो इससे आपका क्रेडिट स्कोर 35 परसेंट तक सही रहता है
  • आपकी क्रेडिट हिस्ट्री भी क्रेडिट स्कोर में 15 परसेंट का रोल निभाती है. यानी कि आप कितने दिनों में अपने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाते हैं, इस पर भी स्कोर निर्भर करता है. क्रेडिट हिस्ट्री ज्यादा दिनों की हो तो उसे अच्छा माना जाता है
  • अगर ज्यादा क्रेडिट लेते हैं तो इससे आपका स्कोर घट सकता है, लेकिन यह पूरे क्रेडिट स्कोर में 10 परसेंट रोल निभाता है
  • अगर आप किसी सामान का बिल चुकाने के लिए क्रेडिट कार्ड पर लोन लेते हैं तो इससे भी क्रेडिट स्कोर पर प्रभाव पड़ता है
  • क्रेडिट स्कोर को जीरो पर ज्यादा दिनों तक नहीं रखना चाहिए क्योंकि बैंक कार्ड को इनएक्टिव कर देते हैं जिससे आपका क्रेडिट स्कोर निगेटिव में जा सकता है

क्रेडिट स्कोर कैसे बढ़ाएं

आप चाहें तो कुछ जरूरी कदम उठाकर या समझदारी के साथ खरीदारी कर क्रेडिट स्कोर को पॉजिटिव बनाए रख सकते हैं. इसके लिए नीचे बताए गए 5 टिप्स अपना सकते हैं-

  • क्रेडिट कार्ड से छोटी खरीदारी करें और हमेशा करें
  • क्रेडिट कार्ड का बिल हमेशा निश्चित समय पर चुकाएं
  • हमेशा अपने क्रेडिट स्कोर को जानते रहें और उसके बारे में पता लगाते रहें
  • क्रेडिट कार्ड पर फिजूलखर्ची करते हैं तो उससे सावधान रहें और इससे बचने की कोशिश करें
  • खुद की क्रेडिट हिस्ट्री बनाएं और पता करें कि कहां कितना खर्च हो रहा है
  • अगर आप इन बातों का खयाल रखें तो क्रेडिट स्कोर कभी निगेटिव नहीं होगा और आगे चलकर लोन आदि लेने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. बैंक भी आपको खुशी-खुशी लोन दे देंगे, कोई कोताही नहीं बरतेंगे.