Tokyo Olympics 2020 : जगमागाते हुए स्टेडियम से दी गई ओलिंपिक खेलों को विदाई, 3 साल बाद पेरिस में फिर मिलेंगे खिलाड़ी

 कोविड-19 ने जब इस दुनिया में पैर पसारना शुरू किए तो टोक्यो ओलिंपिक-2020 (Tokyo Olympics 2020) पर भी इसका असर पड़ा. इन खेलों को एक साल के लिए टाल दिया गया है. एक साल बाद इन खेलों के आयोजन के खिलाफ भी जापान में माहौल बना रहा था, लेकिन सभी मुसीबतों को पीछे छोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) और जापान ने 23 जुलाई से इन खेलों का आयोजन किया जिनका आज यानी रविवार आठ अगस्त को अंत हो गया. जापान ने तमाम मुसीबतों से लड़ते हुए 16 दिनों तक इन खेलों का सफल आयोजन किया. उद्घाटन समारोह की तरह की समापन समारोह भी मनमोहक रहा और शानदार आतिशबाजी, लाइटिंग, डांस ने खिलाड़ियों सहित हर देखने वालों का मन मोह लिया

यह ओलिंपिक इतिहास के सबसे अलहदा खेलों में गिने जाएंगे क्योंकि इन खेलों में दर्शकों को स्टेडियम में आने की मंजूरी नहीं थी. उद्घाटन समारोह से लेकर समापन समारोह में और मैचों में भी दर्शक नहीं थे. ओलिंपिक इतिहास में यह पहले खेल हैं जहां दर्शक मौजूद नहीं थे और इसका कारण कोविड-19 था. जापान ने कोविड-19 से लड़ते हुए बायो सिक्योर बबल बनाया और ओलिंपिक विलेज में खिलाड़ियों को इस बीमारी से बचाने की कोशिश की, हलांकि कोविड ने अपनी छोप इन खेलों में छोड़ी. समापन समारोह में आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक ने ओलिंपिक झंडा फ्रांस के सुपुर्द किया जहां 2024 में अगले ओलिंपिक खेल खेले जाने हैं और टोक्यो ओलिंपिक के अंत का आधिकारिक ऐलान किया. बाक ने कहा, “खिलाड़ी तेज हुए, ऊंची उड़ान तय की और मजबूत बने क्योंकि सभी मुश्किल समय में एक साथ खड़े थे.”

बाक ने कहा थैंक्यू जापान

बाक ने खेलों के समापन की घोषणा करते हुए कहा, “पिछले 16 दिनों से आप सभी ने अपनी उपलब्धियों से हमें हैरान कर दिया है और टोक्यो ओलिंपिक-2020 का जादू बिखेरा है. हम सभी मजबूत हुए हैं क्योंकि हम मुश्किल समय में एक साथ खड़े रहे हैं. हम एक ओलिंपिक विलेज में एक छत के लिए नीचे मजबूती से रहे और यह शानदार संदेश है. आप सभी ने खेल की ताकत को दिखाते हुए सभी को हैरान कर दिया. इन मुश्किल समय में आपने पूरे विश्व को उम्मीद दी है. महामारी की शुरुआत के बाद से पूरा विश्व एक साथ आया. खेल शुरू हुए, सभी एक साथ आए. उसने हमें भविष्य को लेकरे उम्मीद दी. टोक्यो ओलिंपिक खेल, उम्मीद, एकता के संदेश देकर गए. जापानी लोगों को अपने आप पर गर्व होना चाहिए क्योंकि आपने जो हासिल किया है वो शानदार है. थैंक्यू टोक्यो, थैंक्यू जापान.”

खिलाड़ियों ने किया मार्च पास्ट

खिलाड़ियों ने एक घेरे के रूप में स्टेडियम में प्रवेश किया. हर देश का ध्वजवाहक इसमें शामिल था, भारत की तरफ से ध्वजवाहक की जिम्मेदारी निभाई थी पुरुष कुश्ती खिलाड़ी और इन खेलों में कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया ने. उद्घाटन समारोह में हर देश के खिलाड़ियों ने खास तरह के कपड़े पहने थे लेकिन समापन समारोह में ऐसा नहीं था और भारतीय खिलाड़ी ट्रैक सूट में नजर आए. खिलाड़ियों के हाथों में मोबाइल फोन भी थे और भारतीय खिलाड़ियों ने जमकर सेल्फियां लीं.

ये थी थीम

उद्घाटन समारोह की तरह ही समापन समारोह की भी थीम थी और ये थीम थी. ‘Worlds We Share’ थी. शानदार आतिशाबाजी, लाइट्स से लेकर संगीत के अलावा शानदार स्टंट शामिल थे.ओलिंपिक मशाल बुझाने से पहले पहली बार अगले मेजबान देश का राष्ट्रगान दिखाया गया जिसे मेजबान शहर में एक फिल्म के तौर पर फिल्माया गया.

पहली बार ही समापन समारोह में अगले मेजबान देश से लाइव और शानदार जश्न दिखाया गया जिसमें पेरिस और फ्रांस 33वें ओलिंपिक के मेजबान की भूमिका को अपनाता दिखा. इसमें संगीतकार छह विभिन्न स्थानों से परफॉर्म कर रहे थे जिन्होंने पिछले कुछ महीनों में दुनिया के अनुभव को उजागर किया. इसमें संदेश था, ‘‘हम दूर हैं, हम एक साथ होकर एक साथ खेल सकते हैं. ’’

टोक्यू टू पेरिस

टोक्यो के गर्वनर यूरिको कोइके ने ओलिंपिक ध्वज बाक को सौंपा जिन्होंने इसे पेरिस की मेयर एने हिडाल्गो के सुपुर्द किया. टोक्यो ओलिंपिक आयोजन समिति की अध्यक्ष सेको हाशिमोटो ने कहा, ‘‘मैं सभी खिलाड़ियों के प्रति अपना आभार और सम्मान व्यक्त करना चाहूंगी और उन सभी को भी जिन्होंने इन खेलों की तैयारियों के लिए और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए इतनी सारी मुश्किलों को पार किया. ’’

बाक ने दिए मेडल

बाक ने केन्या की पेरेस जेपचिरचिर को महिला मैराथन स्पर्धा का स्वर्ण पदक जबकि पुरूष मैराथन का स्वर्ण एलियूड किपचोगे को दिया. टोक्यो के आसमान में रोशनी का फव्वारा फैल गया और फिर इनसे ओलिंपिक रिंग बनी. कोरोना वायरस प्रोटोकॉल के कारण समारोह दर्शकों के बिना किया गया लेकिन आयोजकों ने स्टेडियम के अंदर स्क्रीन लगायी थी जिसमें दुनिया भर के प्रशंसकों के वीडियो दिखाये जा रहे थे.

इस तरह हुई थी शुरुआत

समापन समारोह एक वीडियो के साथ शुरू हुआ जिसमें 17 दिन की स्पर्धाओं का सार था. अंतिम अध्याय की शुरुआत स्टेडियम में आतिशबाजी से हुई जिसमें आयोजकों ने ‘‘अनगिनत व्यक्तियों के लिए आभार व्यक्त किया’’ जिन्होंने ओलिंपिक खेलों को समापन समारोह तक पहुंचाने में मदद की. इसके बाद जापान के क्राउन प्रिंस अकिशिनो और अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक आधिकारिक स्टैंड में उपस्थित हुए.

शुरूआती वीडियो में फोकस रिकॉर्ड और स्कोर पर नहीं बल्कि उन सभी खिलाड़ियों के साहसिक प्रयासों पर था जिन्होंने रोज कोविड-19 जांच करवाते हुए कड़े बायो-बबल में हिस्सा लिया. समारोह का मुख्य संदेश था कि खेल एक उज्जवल भविष्य के दरवाजे खोलेंगे.

भारत का सर्वश्रेष्ठ ओलिंपिक

कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया भारतीय दल के ध्वजवाहक थे और भारत के सबसे बड़े दल ने इतिहास में सबसे ज्यादा पदक हासिल कर खेलों को ‘गुडबॉय’ कहा. भारत सात पदक से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके निश्चित उज्जवल भविष्य की ओर देख सकता है जिसमें भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने 13 साल बाद पहला स्वर्ण दिलाया जो खेलों में ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धा का देश का पहला पदक भी है. भारत ने इस स्वर्ण के अलावा दो रजत और चार कांस्य पदक भी जीते।

अमेरिका पदक तालिका में 113 पोडियम स्थान से शीर्ष पर रहा जिसमें 39 स्वर्ण पदक थे जबकि चीन 38 स्वर्ण से 88 पोडियम स्थान से दूसरे स्थान पर रहा. मेजबान जापान 27 स्वर्ण सहित 58 पदकों से तीसरे स्थान पर रहा.