देश में पहली बार होगी मोबाइल ऐप से जनगणना, सरकार ने बताया, आम आदमी को क्‍या करना होगा

 केंद्र सरकार की तरफ से एक लिखित जवाब में सदन को यह बताया गया है कि देश में पहली बार जनगणना का काम पूरी तरह से डिजिटली होगा. साथ ही डाटा कलेक्‍शन भी एक मोबाइल एप के जरिए पूरा किया जाएगा. आपको बता दें कि भारत में हर 10 साल में जनगणना का काम पूरा किया जाता है. भारत इस समय दुनिया का वो देश है जिसकी आबादी तेजी से बढ़ रही है. इस समय देश की आबादी 130 करोड़ से ज्‍यादा है.

मोबाइल फोन नंबर होगा जरूरी

केंद्र सरकार में गृह राज्‍य मंत्री नित्‍यानंद राय की तरफ से लिखित सवाल का जवाब दिया गया. उन्‍होंने सदन को बताया है कि एक मोबाइल एप की मदद से डाटा को कलेक्‍ट किया जाएगा. साथ ही जनगणना पोर्टल की मदद से अलग-अलग आंकड़ों पर नजर रखी जाएगी और इसे मैनेज किया जाएगा. जो जानकारी सरकार की तरफ से दी गई है उसके मुताबिक पोर्टल पर मोबाइल फोन नंबरों की जरूरत होगी और साथ ही व्‍यक्तियों के बारे में दूसरी जानकारियों की आवश्‍यकता पड़ेगी. सरकार की तरफ से कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के चलते जनगणना से जुड़ी बाकी गतिविधियों को अगले आदेश के लिए स्‍थगित कर दिया गया है.

जानकारी सुरक्षित रखने का भरोसा

किसी भी व्‍यक्ति को हर क्षेत्र के लिए दिए गए जरूरी कोड्स की मदद से आवश्‍यक जानकारियों को भरना होगा. इसके बाद एक आईडेंटिफिकेशन नंबर को रजिस्‍टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा. इसी नंबर को गणना करने वाले अधिकारियों की मदद के लिए उनसे साझा करना होगा ताकि डाटा ऑटोमेटिकली सिंक हो सके. केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया है कि जो डाटा इकट्ठा होगा उसका प्रयोग बाकी दूसरे डाटाबेस जैसे कि नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजंस को तैयार करने में भी किया जाएगा. केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया है, ‘हर व्‍यक्ति का डाटा जनगणना में जनगणना एक्‍ट 1948 के तहत कलेक्‍ट किया जाएगा और कानून के तहत इसे किसी भी तरह से सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.’

अब तक हुई 15 बार जनगणना

सरकार का कहना है कि इस समय किसी भी जाति से जुड़े आंकड़ों को जारी करने का उसका कोई इरादा नहीं है. देश में हर 10 साल बाद जनगणना का काम किया जाता है. साल 2011 तक 15 बार भारत की जनगणना की जा चुकी है. पहली बार जनगणना का काम 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो की तरफ से कराया गया था. भारत की पहली और आधिकारिक जनगणना 1881 में हुई. साल 1949 के बाद से भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त द्वारा इस काम को किया जाता है. साल 1951 के बाद जनगणना का पूरा जनगणना अधिनियम-1948 के तहत पूरा किया गया. आखिरी बार साल 2011 में जनगणना कराई गई थी.