जब टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में आया लैपटॉप, सचिन तेंदुलकर रह गए हैरान, पूछा- क्रिकेट में इसका क्या काम

 मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने क्रिकेट में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भारतीय क्रिकेट का एक दिलचस्प वाक्या बताया है. साथ ही उन्होंने बताया कि किस तरह इसके आने से उन्हें खेल में मदद मिली. एक इंटरव्यू के दौरान तेंदुलकर ने कहा कि 2002 वह साल था जब भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में पहली बार लेपटॉप आया था. इसे देखकर वे एकबारगी हैरान रह गए थे. उन्होंने पूछ लिया था कि क्रिकेट में लेपटॉप का क्या काम है. लेकिन धीरे-धीरे उन्हें समझ आ गया कि किसी तरह से तकनीक के इस्तेमाल से खेल में सुधार किया जा सकता है.

सचिन तेंदुलकर ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘तकनीक ने सब कुछ बदल दिया है. 2002 में ड्रेसिंग रूम में लेपटॉप लाया गया और मैंने पूछा कि लेपटॉप क्या करेगा ड्रेसिंग रूम में? उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से टीम को काफी फायदा हुआ. इसमें कुछ वक्त लगा लेकिन सबने इसे अपनाया और इसके हिसाब से ढल गए. समय के हिसाब से इसे अपना लिया गया. फिर जब अपना लिया जाता है तो उसके हिसाब से ढल भी जाते हैं. हमारी टीम मीटिंग और बेहतर होने लगीं. इसे किसी की व्यक्तिगत सोच पर नहीं छोड़ा गया. इसलिए मीटिंग पहले की तरह नहीं होती थी जहां हम कहा करते थे कि याद है ना मेलबर्न में आउटस्विंग पे आउट किया था. और यह कहने के बाद किसी को पता नहीं होता था कि मेलबर्न में क्या हुआ था और किसने किसे कैसे आउट किया था.’

सचिन केवल विरोधी गेंदबाजी को देखते थे

भारत के पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि तकनीक की मदद से आसानी से बताया जा सकता है कि बल्लेबाज का पैर कहां पड़ रहा था और कोई बल्लेबाज एक ही तरह से कैसे आउट हो रहा था. लेकिन ऐसा कहना चाहिए कि सभी क्रिकेटर्स को तकनीक के इस्तेमाल से मजा नहीं आ रहा था. कुछ को लगता है कि इसकी अति हो रही है. सचिन ने बताया कि तकनीक के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने अलग रणनीति अपनाई. उन्होंने माना कि अगर वे इसमें ज्यादा घुस जाएंगे तो दिमाग गड़बड़ हो जाएगा. तेंदुलकर ने कहा कि वह अक्सर विरोधी टीम की बॉलिंग को देखा करते थे लेकिन वह अपनी बैटिंग ज्यादा नहीं देखते थे. उनकी योजना गेंदबाजों के हिसाब से पूरी तैयारी रखने की होती थी.