टीम इंडिया की बेंच स्ट्रेंथ के बाद राहुल द्रविड़ का नया लक्ष्य- भारतीय कोचों के लिए NCA में खास कोर्स

 भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) की मौजूदा मजबूती में बहुत बड़ा योगदान पूर्व महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) का भी है. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने पिछले कुछ सालों में भारत की अंडर-19 और इंडिया-ए टीमों की कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली, जहां उनसे सीखकर कई खिलाड़ी टीम इंडिया के लिए खेल चुके हैं. इसके अलावा द्रविड़ नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) का भी संचालन कर रहे हैं, जहां देश के क्रिकेटरों की फिटनेस से लेकर नए कोचेज को भी ट्रेनिंग दी जाती है. टीम इंडिया की बेंच स्ट्रेंथ मजबूत करने के साथ ही राहुल द्रविड़ आने वाले वक्त के लिए भारतीय कोचों का भी मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने NCA में कोचिंग कार्यक्रम (कोर्स) को नया रूप दिया है, जिसमें अब विभिन्न क्षेत्रों से होने वाले चयन दबाव सहित मैदान के बाहर के मुद्दों से निपटने के लिए भविष्य के कोचों के लिए ‘कॉर्पोरेट कक्षाओं’ का आयोजन हो रहा है.

द्रविड़ का NCA प्रमुख के तौर पर कार्यकाल खत्म हो रहा है और उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से आवेदन कर दिया है. ऐसे में उन्हें टीम इंडिया के कोच के रूप में देखना का भारतीय फैंस का सपना भले ही फिलहाल पूरा न हो, लेकिन वह भारतीय क्रिकेट के लिए लगातार बेहतर काम कर रहे हैं और इसमें भारतीय कोच को तैयार करना भी अहम है. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेल चुके कुछ बड़े खिलाड़ियों ने हाल ही में बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड ) के लेवल – दो कोचिंग पाठ्यक्रम में भाग लिया. ये सभी सैद्धांतिक और व्यावहारिक (थ्योरी और प्रैक्टिकल) परीक्षा में  भी शामिल हुए. इनका संचालन द्रविड़ की निगरानी में NCA में ही हुआ.

कोचिंग से बाहर की समस्याओं से निपटने की समझ

कोचिंग की आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसके पाठ्यक्रम में बदलाव किये गये है जिसमें ‘कॉर्पोरेट समस्या समाधान कक्षा’ को जगह मिलना हैरान करने वाला है. इसमें पाठ्यक्रम में शामिल लोगों को मैदान के बाहर के विभिन्न मुद्दों और उससे जुड़े हितधारकों से निपटने के तरीके को खोजने के लिए प्रेरित किया जाता है. इस पाठ्यक्रम का हिस्सा रहे प्रथम श्रेणी के एक पूर्व क्रिकेटर ने गोपनीयता की शर्त पर समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “इस पाठ्यक्रम को मुंबई के पूर्व तेज गेंदबाज शेमल (वेनगांवकर) ने तैयार किया है, जो एमबीए हैं और उन्हें कॉर्पोरेट जगत में काम करने का अनुभव है. मैंने कभी इस तरह की कक्षा में भाग नहीं लिया लेकिन यह बहुत ही अनोखा था और इसने मुझे अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में मदद की.”

उन्होंने बताया कि इसमें ‘सौदेबाजी’ और ‘सुलह’ के अंतर को समझाया गया. इसमें बताया गया कि हमें समस्या का समाधान ढूंढने के साथ यह भी देखना होगा कि उसे हल करने का कौन-कौन सा तरीका है. उन्होंने बताया ‘‘इसमें कोच के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं का जिक्र था. इसमें यह बताया गया कि कैसे चयनकर्ता कोच से अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है. क्या कोच चयनकर्ता को प्रशासकों से मदद लेने के लिए मना सकता है?”

द्रविड़ भी दे रहे साथ

इस पाठ्यक्रम के दौरान द्रविड़ ने किसी कक्षा का संचालन नहीं किया लेकिन वह छात्र की तरह कोचिंग का प्रशिक्षण लेने वालों के साथ बैठे थे. द्रविड़ के खिलाफ खेल चुके प्रथम श्रेणी के एक अन्य पूर्व खिलाड़ी ने कहा, ‘‘वास्तव में जब हमें खिलाड़ियों के वीडियो दिखाए जाते थे और समाधान के बारे में बताने के लिए कहा जाता था, तो राहुल भाई भी हमारे साथ जुड़ जाते थे और समस्या का पता लगाने की कोशिश करते थे. वह हमें बताते थे कि वह अभी भी एक छात्र की तरह महसूस करते है और जिस दिन वह सीखना बंद कर देगा, वह दिन इस क्षेत्र में उनका आखिरी दिन होगा.’’ पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले में रॉबिन बिष्ट, जकारिया जुफरी, प्रभंजन मलिक, उदय कौल, सागर जोगियानी, सरबजीत सिंह, अरिंदम दास, सौराशीष लाहिड़ी, रणदेब बोस, केबी पवन और कोनोर विलियम्स जैसे कुछ पूर्व और वर्तमान खिलाड़ी शामिल हैं.