21 महीनों में खेले केवल 3 टेस्ट, कभी था कोहली की आंखों का तारा, अब टीम में जगह मिलने को भी तरसा

 भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट के लिए प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए. इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी पूरी तरह से फिट नहीं है. इनकी जगह उमेश यादव (Umesh Yadav) और शार्दुल ठाकुर की एंट्री हुई. इनमें उमेश का टीम में आना एक अच्छा कदम कहा जा सकता है. इस गेंदबाज को हालिया समय में सबसे ज्यादा नजरअंदाज़ी का शिकार होना पड़ा है. मोहम्मद सिराज के आने के बाद से तो उमेश यादव को लगभग भुला ही दिया गया है. बची-खुची कसर बदकिस्मती ने पूरी कर दी है. जब भी खेलने का मौका मिलता है तो चोट के चलते बाहर होना पड़ा है. विराट कोहली की कप्तानी में भारत के टेस्ट फॉर्मेट में कामयाबी की कड़ी में उमेश का भी अहम योगदान रहा है. इशांत शर्मा, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी के साथ मिलकर वे भारतीय तेज गेंदबाजी के अभिन्न अंग रहे हैं. लेकिन पिछले दो साल से उनकी काफी अनदेखी हो रही है.

33 साल के उमेश यादव ने अभी तक 49 टेस्ट मैच खेले हैं और 148 विकेट लिए हैं. 88 रन देकर छह विकेट उनका बेस्ट प्रदर्शन रहा है. करियर की शुरुआत में अपेक्षाएं जगाने के बाद उमेश कंसिस्टेंसी की कमी से जूझते रहे थे. लेकिन कोहली के कप्तान बनने के बाद से उनमें सुधार दिखा. उनके आंकड़ों से यह बात साफ जाहिर होती है. 2011 में जब उन्होंने डेब्यू किया था तब तीन टेस्ट में उन्होंने 22.93 की औसत से 16 विकेट लिए थे. लेकिन इसके बाद 2012, 2014, 2015 और 2016 में उनके खेल में गिरावट दिखी. उनकी विकेट लेने की औसत इस दौरान क्रमश: 42.06, 36.60, 45.90 और 49.13 की रही. मगर 2017 के बाद उनके खेल में जबरदस्त सुधार हुआ. उमेश ने 2017 में 10 टेस्ट में 29.25 की औसत से 31, 2018 में पांच टेस्ट में 21.40 की औसत से 20 और 2019 में चार टेस्ट में 13.65 की औसत से 23 विकेट निकाले.

चोट के चलते छोड़ना पड़ा था ऑस्ट्रेलिया दौरा

मगर 2020 से उमेश यादव का समय सही नहीं रहा. जनवरी 2020 से अभी तक उन्होंने केवल तीन टेस्ट खेले थे. इनमें से एक कोरोना आने से पहले और दो बाद में. इनमें उनके नाम छह विकेट थे. वे ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी गए थे लेकिन चोट के चलते बीच में ही दौरा छोड़ना पड़ा था. मेलबर्न में वे आखिरी टेस्ट खेले थे तब उनका प्रदर्शन भी अच्छा रहा था. तब उन्होंने 3.3 ओवर में पांच रन देकर एक विकेट लिया था. लेकिन बदकिस्मती से चोट ने आगे खेलने नहीं दिया. इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्हें लिया नहीं गया. अब इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें पहले तीन टेस्ट में खेलने का मौका नहीं मिला.

बीच में एक बार तो 33 साल के उमेश यादव ने कह दिया था कि उनके करियर के कुछ ही साल बचे हैं. ऐसे में उन्हें खेलने के ज्यादा से ज्यादा मौके मिलने चाहिए. उन्होंने इंग्लैंड के काउंटी क्रिकेट और भारतीय घरेलू क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी में खेलने की इच्छा जताई थी. लेकिन टीम इंडिया के साथ रहने के चलते ऐसा हो नहीं पाया.