सिर्फ इन दस्तावेजों को देकर कर्ज न लेने वाले किसान करवा सकते हैं फसल बीमा, जानिए सबकुछ

 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) में शामिल होने अंतिम तारीख नजदीक आ गई है. इसके लिए आवेदन सिर्फ 31 जुलाई तक किए जा सकते हैं, यानी अब इसके लिए किसानों के पास सिर्फ 16 दिन का वक्त बचा है. इस स्कीम को सरकार ने स्वैच्छिक कर दिया है, जबकि पहले बैंक से कृषि कर्ज लेने वाले किसानों के अकाउंट से ऑटोमेटिक इसका प्रीमियम कट जाता था. ऐसे किसानों को अब लिखित देना होगा कि उन्हें बीमा चाहिए या नहीं. लेकिन जिन किसानों (Farmers) पर कोई सरकारी कर्ज नहीं है उन्हें कैसे इसका फायदा मिलेगा.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस बारे में पूरी जानकारी दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का दावा है कि योजना स्वैच्छिक होने के बाद भी काफी किसान इस स्कीम से जुड़ रहे हैं. योजना की शुरूआत से दिसंबर-2020 तक किसानों ने लगभग 19 हजार करोड़ रुपये का प्रीमियम भरा, जिसके बदले उन्हें लगभग 90 हजार करोड़ रुपये का भुगतान क्लेम के रूप में मिला. ऐसे में हर किसान इसका फायदा उठाए, वो फायदे में रहेगा.

गैर ऋणी किसानों के लिए जरूरी दस्तावेज

-खेती योग्य जमीन का दस्तावेज.
-भूमि कब्जा प्रमाण पत्र
-आधार कार्ड (Aadhaar Card)
-प्रथम पृष्ठ-बैंक खाता के विवरण के साथ बैंक पासबुक.
-फसल बुआई प्रमाण पत्र
(यदि राज्य सरकार की अधिसूचना में अनिवार्य किया गया हो)
-बटाईदार किसानों या किराए पर ली गई जमीन पर भी बीमा की सुविधा.
-ऐसे लोगों के लिए भूमि मालिक के साथ समझौता, किराया या पट्टा दस्तावेज.

कहां होगा आवेदन

-बैंक शाखा, सहकारी समिति
-जन सेवा केंद्र
-पीएमएफबीवाई पोर्टल (www.pmfby.gov.in) पर.
-इंश्योरेंस कंपनी या कृषि कार्यालय.

एक सप्ताह पहले बाहर हो सकता है किसान

-कर्जदार किसान अगर इस योजना में शामिल नहीं होना चाहता तो आवेदन की अंतिम तिथि से 7 दिन के पहले संबंधित बैंक शाखा में ऑप्ट-आउट फॉर्म या स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करके इससे बाहर हो सकता है. इसके बाद उसके अकाउंट से फसल बीमा प्रीमियम नहीं कटेगा.
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक 13 जनवरी 2016 को जब इस स्कीम की शुरुआत की गई थी तब सरकार से कृषि कर्ज (Agri loan) लेने वाले किसानों के लिए बीमा योजना के तहत फसल का इंश्योरेंस करवाना जरूरी किया गया था. किसानों की मांग पर खरीफ सीजन-2020 से इसे स्वैच्छिक कर दिया गया.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक यह योजना कर्जदार और गैर-ऋणी दोनों तरह के किसानों के लिए है. बीमा लेने वाले गैर-ऋणी किसानों की संख्या 2020-21 में 35.5 फीसदी हो गई है, जो 2014-15 में सिर्फ 5.4 परसेंट थी.