क्या है ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट, जिससे पेट्रोल-डीजल नहीं देश में चलेंगी हाइड्रोजन वाली बसें

 हरित और टिकाऊ भविष्य के लिए हाइड्रोजन एनर्जी की अहमियत हर दिन बढ़ती ही जा रही है. ईंधन स्रोत के रूप में हाइड्रोजन की चर्चा तो दशकों से हो रही है, लेकिन अब इस तकनीक के लिए भारत तैयार है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी देश की पहली हरित हाइड्रोजन परिवहन परियोजना यानि फर्स्ट ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट की स्थापना करने वाली है. इस परियोजना के पूरे हो जाने के बाद लद्दाख हाइड्रोजन आधारित ग्रीन ट्रांसपोर्ट सर्विस शुरू करने वाला देश का पहला प्रदेश और लेह पहला शहर बन जाएगा.

इसके तहत, पहले चरण में लेह जिले में पांच बसें चलाने की योजना है. केंद्रीय विद्युत मंत्री आर.के.सिंह ने कहा कि लेह जल्द ही जीरो कार्बन उत्सर्जन के साथ ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांसपोर्ट सर्विस शुरू करने वाला देश का पहला प्रदेश बन जाएगा. लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनाने के लिए सरकारी स्तर पर बड़े पैमाने पर काम चल रहा है. एनटीपीसी की सहायक कंपनी आरईएल के साथ लद्दाख प्रशासन का एमओयू हुआ है.

लद्दाख को कार्बन रहित बनाने का सपना

एनटीपीसी के जनरल मैनेजर डीएमआर पांडा एक वेबिनार में कहते हैं कि ग्रीन हाइड्रोजन को फ्यूल के तौर पर बस में डाला जाएगा. इसके लिए 2 रूट लिए जाएंगे पहला लद्दाख और दूसरा दिल्ली. इन दोनों रूट पर 5-5 बसें चलाई जाएंगी. दरअसल, देश और विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद लद्दाख को कार्बन रहित बनाना पीएम मोदी का सपना है.

डीएमआर पांडा कहते हैं कि लद्दाख लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और बहुत अधिक मात्रा में यहां डीजल, केरोसिन, एलपीजी ट्रांसपोर्ट किया जाता है, यही हमें डी-कार्बनाइज करना है. इसमें ये ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट मदद करेगा.

ग्रीन हाइड्रोजन ही क्यों?

दरअसल, दुनिया भर में ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर होड़ शुरू हो चुकी है. कई कंपनियां, निवेशक, सरकारें और पर्यावरणवादी मानते हैं कि यह एक ऐसा ऊर्जा स्रोत है जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को खत्म करने में मददगार साबित होगा और दुनिया को और गर्म होने से बचाएगा. आज हमारे द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बिजली का ज्यादातर हिस्सा थर्मल एनर्जी प्लांट में पैदा होता है. बिजली पैदा करने की यह पूरी प्रक्रिया कोयले पर निर्भर होती है. ऐसे में हाइड्रोजन क्लीन एनर्जी का भंडार भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी उम्मीद जगाती है.

ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट

लद्दाख को कार्बन रहित बनाने की मुहिम के तहत उपराज्यपाल प्रशासन ने लेह में 1.25 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन जेनरेशन पायलट प्रोजेक्ट बनाने के लिए नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किया है. बता दें, लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में यह तीसरा समझौता है.

नेशनल ग्रीन एनर्जी मिशन

फरवरी 2021 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हरित ऊर्जा स्रोतों से हाइड्रोजन बनाने के लिए नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन को शुरू करने का प्रस्ताव रखा. केंद्र सरकार का यह ऐलान देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. केंद्र सरकार के अनुसार, 5 साल में भारत अक्षय ऊर्जा यानि रिन्यूएबल एनर्जी स्थापित करने की क्षमता को ढाई गुना तक बढ़ाएगा.

हाइड्रोजन का उत्पादन घरेलू स्रोतों जैसे कि प्राकृतिक गैस, नाभिकीय ऊर्जा, बायोमास और सौर एवं पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से हो सकता है. ये क्षमताएं ही हाइड्रोजन को परिवहन और बिजली उत्पादन का एक आकर्षक विकल्प बनाती हैं और इसीलिए आज हम ग्रीन हाइड्रोजन को एक ऐसे विकल्प के रूप में देख पा रहे हैं जिसमें कई समस्याएं सुलझाने की क्षमता है.