इस कारण मिली थी भारत को 2011 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जीत, सुरेश रैना ने खोले राज

 भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 2011 विश्व कप की जीत ऐतिहासिक है. महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद वनडे विश्व कप का खिताब उठाया था. लेकिन यह जीत आसान नहीं थी, खासकर क्वार्टर फाइनल से आगे जाना टीम के लिए बड़ी चुनौती रहा था क्योंकि क्वार्टर फाइनल में भारत के सामने थी मौजूदा विजेता और दुनिया की बेहतरीन टीमों में से एक ऑस्ट्रेलिया . रनों का पीछा कर रही भारत की स्थिति भी अच्छी नहीं थे लेकिन दो बाएं हाथ के बल्लेबजों- युवराज सिंह (Yuvraj Singh) और सुरेश रैना (Suresh Raina) ने भारत को जीत की दहलीज पार करा दी और उसके बाद जो हुआ इतिहास है. रैना ने उस मैच में अहम पारी खेली थी और अब उन्होंने बताया है कि उनको इसकी हिम्मत, प्ररेणा कहां से मिली थी.

1999 विश्व कप के बाद पहली बार था जब ऑस्ट्रेलिया को क्वार्टर फाइनल में हार मिली हो. 261 रनों का पीछा करते हुए भारत ने अपने धुरंधरों को खो दिया था और फिर युवराज -रैना ने 74 रनों की साझेदारी कर सेमीफाइनल में पहुंचाया. यह रैना का उस विश्व कप में दूसरा ही मैच था. रैना ने अब बताया है कि सचिन तेंदुलकर के शब्दों ने उनमें जान फूंक दी थी.

जादू महसूस हुआ

रैना ने गौरव कपूर के पोडकास्ट पर यह बात बताते हुए कहा, “मैं सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग के पास बैठा था. गौती भाई (गौतम गंभीर) रन आउट हो गए और फिर माही भाई भी आउट हो गए. मैं उस समय पैड पहन रहा था. सचिन पाजी ने मेरे ऊपर अपना हाथ रखा. वह साई बाबा का कड़ा पहने हुए थे. उन्होंने मुझसे कहा कि’ ये तुम्हारा दिन है. तुम जाओ और हमारे लिए मैच जीतकर आओ. मुझे लगता है सुरेश ये तुम्हारा दिन है.’ जैसे ही ये हुआ मुझे लगा कि मेरे अंदर जादू हुआ है. जब मैं मैदान के अंदर जा रहा था, युवी पा ने कहा कि छोड़ना नहीं है. मैंने कहा ठीक है पाजी, अपना बेस्ट करेंगे.”

ऐसे हुआ कमाल

रैना ने फिर कहा, “हमने जब बल्लेबाजी शुरू की तो हमने दो रन, चौके लेने शुरू किए और हमें दर्शकों से समर्थन भी मिला. हम जैसे-जैसे अपनी साझेदारी आगे बढ़ा रहे थे दर्शक हमारे साथ होते जा रहे थे. हमें मैच में लय मिल चुकी थी. जैसे ही मैच खत्म हुआ और हम जीते मुझे लगा कि यह भगवान का आशीर्वाद है. हम सभी सचिन पाजी के लिए विश्व कप जीतना चाहते थे और यह अच्छे दिन हुआ.”