Explained: मास्टरकार्ड और Visa कैसे करते हैं काम, जानिए ग्राहकों से कैसे होती है कमाई

 मास्टरकार्ड पर अभी हाल में रिजर्ब बैंक ने रोक लगाई है. इसके बाद यह कार्ड चर्चा में है. मास्टरकार्ड और वीजा दोनों भारत में पेमेंट के लिए सबसे बड़ा स्रोत माने जाते हैं. आप अपना डेबिट और क्रेडिट कार्ड देख सकते हैं जिस पर मास्टरकार्ड या वीजा लिखा होता है. इससे आपके मन में सवाल उठता होगा कि इन कार्ड से इन कंपनियों की कैसे कमाई होती है और ये दोनों कार्ड आखिर काम कैसे करते हैं?

यहां जानना जरूरी है कि दोनों कार्ड कंपनियां ग्राहकों को डायरेक्ट कार्ड जारी नहीं करतीं बल्कि बैंकों के जरिये ग्राहकों को दिया जाता है. दोनों कंपनियों के साथ बैंकों का टाइ-अप होता है जिसके तहत ग्राहकों को कार्ड जारी होता है. इसी में ग्राहकों को क्रेडिट, डेबिट और प्रीपेड कार्ड भी जारी किए जाते हैं.

ये कार्ड कैसे काम करते हैं

मास्टरकार्ड Mastercard और वीजा visa का काम एक ही तरह का है. ये दोनों कार्ड एटीएम कार्ड की तरह ही काम करते हैं. इसमें कार्डहोल्डर, कंपनी या बिजनेस, बैंक और कार्ड की कंपनी (मास्टरकार्ड और वीजा) की साझेदारी होती है. कार्ड कंपनी बैंकों को अपनी सेवा देती हैं. बैंक फिर उसी कार्ड को ग्राहकों को जारी करते हैं. जिस कंपनी का कार्ड इस्तेमाल करते हैं, ग्राहक जब ट्रांजेक्शन करता है तो पेमेंट पहली उस कंपनी को जाता है जिसके आधार पर पेंमेंट को ऑथेंटिकेट किया जाता है. मर्चेंट पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम कस्टमर के अकाउंट की सारी जानकारी लेता है और पेमेंट को उस बिजनेस या मर्चेंट को देता है जिसके लिए कार्ड स्वैम किया जाता है.

कंपनी के पास जाती है पूरी जानकारी

कार्ड जारी करने वाला बैंक ट्रांजेक्शन को ऑथराइज करता है और उसका रेस्पॉन्स मर्चेंट के पास जाता है. इसके बाद उस मर्चेंट या बिजनेस के पास कार्ड से पैसा ट्रांसफर हो जाता है. जिस बैंक में ग्राहक का खाता है या जिस बैंक से मास्टरकार्ड या वीजा कार्ड होता है, उस बैंक खाते से मर्चेंट को पैसा ट्रांसफर हो जाता है. जब-जब कोई ग्राहक इस कार्ड को इस्तेमाल करता है, उस कंपनी के सर्वर के पास इसकी पूरी जानकारी जाती है. इन कंपनियों के सर्वर विदेशों में हैं जहां सूचनाओं की प्रोसेसिंग और वेरिफिकेशन का काम होता है. जो बैंक इन कार्ड की सेवाएं लेते हैं, वे साल की हर तिमाही पर फीस चुकाते हैं.

कार्ड कंपनियों की कमाई कैसे होती है

BankBazaar के सीईओ अदील शेट्टी ने CNBCTV18 को बताया कि कार्ड से हर ट्रांजेक्शन पर इंटरचेंज फी के तौर पर रकम ली जाती है. यह अमाउंट ट्रांजेक्शन का बहुत ही कम होता है. यह प्रति ट्रांजेक्शन का 0.5-3.5 परसेंट तक हो सकता है. यह फी कार्ड जारी होने के समय ही तय कर दी जाती है. इसमें कुछ हिस्सा बैंकों का भी होता है. इसलिए जब भी कोई ट्रांजेक्शन होता है, उसमें से बैंक और कार्ड कंपनी-मास्टरकार्ड या वीजा को रकम दी जाती है. कार्ड कंपनियों की इसी से असली कमाई होती है.

इसके अलावा कार्ड कंपनियां बैंकों से सालाना लाइसेंसिंग फीस भी लेते हैं. अगर बैंक कार्ड पर अपना नाम छपवाना चाहते हैं, लोगो या ब्रांड देना चाहते हैं तो उसका अलग से शुल्क चुकाना होता है. कार्ड कंपनियां ट्रांजेक्शन प्रोसेस में लगने वाले सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का सर्टिफिकेशन जारी करती हैं. किसी भी बैंक से टाइअप करने से पहले इस तरह का सर्टिफिकेशन देना जरूरी होता है ताकि सुरक्षित बैंकिंग सिस्टम में मदद मिल सके.