आखिर ऐसा क्या हुआ कि, एमेजॉन के कहने पर एपल ने अपने प्लेस्टोर से इस ऐप को हटा दिया, जानें पूरा मामला

 दिग्गज तकनीकि कंपनी एपल ने एमेजॉन के अनुरोध के बाद अपने ऐप स्टोर से फेकस्पॉट नामक एक ऐप को हटा दिया है. आईओएस यूजर्स के लिए पिछले महीने लॉन्च किया गया यह ऐप एमेजॉन पर नकली उत्पादों की समीक्षाओं को फिल्टर करता या छुपाता था. इसे अब कंपनी ने हटा लिया है.

द वर्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, एमेजॉन ने कहा है कि जिस तरह से फेकस्पॉट ऐप पर कोई नया अपडेट बिना किसी अनुमति के उनकी साइट की रैपिंग कर रहा था, यह चिंताजनक था क्योंकि इससे एमेजॉन के ग्राहकों को डेटा के चोरी होने का डर था. फेकस्पॉट के संस्थापक सऊद खलीफा ने टेक वेबसाइट को बताया कि एपल ने बिना किसी स्पष्टीकरण के ऐप को अचानक हटा दिया.

एपल ने भी ऐप को हटा दिए जाने की पुष्टि की है. 9 टू 5 गूगल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऐप अपने वेब ब्राउजर के एक्सटेंशन की तरह से था, जो एमेजॉन के प्रोडक्ट पेज पर फर्जी समीक्षाओं की पहचान करने के लिए अनौपचारिक तरीकों का उपयोग करके इससे जुड़ा था.

दूसरी तरफ एमेजॉन ने दावा किया है कि ऐप ने कोड इंजेक्ट किया है, जिससे यूजर्स के डेटा को खतरा पहुंच सकता है और साथ ही उपभोक्ताओं को विक्रेताओं के बारे में भ्रामक जानकारियां भी दे सकता है. एमेजॉन ने पुष्टि की कि उसने एपल को दिशानिर्देश 5.2.2 के तहत ऐप को हटाने के लिए कहा था, जो डेवलपर्स को बिना अनुमति के ऐप में तीसरे पक्ष की सामग्री का उपयोग करने से रोकता है.

फेकस्पॉट के डेपलपर्स ने बताया कि एमेजॉन ने ऐप स्टोर पर फेकस्पॉट के कीवर्डस के लिए सर्च रिजल्ट्स खरीदे थे ताकि यूजर्स को ऐप को ढूंढने से रोका जा सके.

एमेजॉन का यह भी दावा है कि फेकस्पॉट की कोडिंग तकनीक ऐप के लिए ग्राहकों से जानकारी एकत्र करना और ट्रैक करना संभव बनाती है. कंपनी ने पिछले जनवरी में पेपाल के स्वामित्व वाले हनी के खिलाफ इसी तरह के दावे किए थे, एक ब्राउजर एक्सटेंशन जो उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन खरीदारी करते समय कूपन खोजने देता है, उपयोगकर्ताओं को चेतावनी देता है कि यह “सुरक्षा जोखिम” हो सकता है.