क्रेडिट कार्ड पर लगते हैं 7 अलग-अलग चार्ज, पैसा कटने पर भी पता नहीं चलता, आप यहां जान लें

 क्रेडिट कार्ड बहुत काम की चीज है. जेब में पैसे न भी हों तो खरीदारी की जाती है. पैसे एक-डेढ़ महीने बाद चुका सकते हैं. इससे खरीदारी करने पर क्रेडिट हिस्ट्री भी बनती है जिसकी मदद से बाद में लोन लेने में आसानी होती है. आपने देखा होगा कि बैंक के कर्मचारी अकसर फ्री क्रेडिट कार्ड बोलकर ग्राहकों से बेचते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि फ्री क्रेडिट कार्ड के साथ कई शर्तें होती हैं जिसके बारे में ग्राहक पहले पता नहीं करता. बाद में जब चार्ज देना पड़ता है, तो उसे अफसोस होता है. ज्यादातर ग्राहक क्रेडिट कार्ड का सालाना शुल्क ही देखते हैं, बाकी के शुल्क पर नजर नहीं डालते. लेकिन कई चार्ज ऐसे होते हैं जो कार्ड से जुड़े होते हैं लेकिन उनके कटने पर भी पता नहीं चलता. ऐसे चार्ज के बारे में जान लेना जरूरी होता है.

इस लिस्ट में 7 अलग-अलग चार्ज आते हैं. इनमें एनुअल मेंटीनेंस चार्ज, कैश एडवांस फी, ओवर लिमिट फी, लेट पेमेंट चार्जेज, इंटरेस्ट रेट, जीएसटी और फॉरेन करंसी मार्क अप फी शामिल हैं.

1-एनुअल मेंटीनेंस चार्ज

यह चार्ज एनुअल फी Annual Maintenance Charge के रूप में प्रचलित है. यह हिडेन चार्ज नहीं होता अर्थात बैंक इस चार्ज के बारे में प्राथमिकता से बताते हैं. यह फी साल में एक बार ली जाती है. अलग-अलग कार्ड पर इस फी की मात्रा अलग होती है. कभी-कभी बैंक फ्री एनुअल फी की बात करते हैं. यानी कि जॉइनिंग फी या एनुअल फी के नाम पर कोई रुपया नहीं लिया जाता. हालांकि यह कुछ खास अवधि के लिए ही होता है.

2-कैश एडवांस फी

आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट का कुछ हिस्सा कैश लिमिट cash advance fee के तौर दिया जाता है. यह वो अमाउंट होता है जिसे आप एटीएम से निकाल सकते हैं. क्रेडिट कार्ड से कैश लिमिट का फायदा लेना या एटीएम से पैसे निकालना महंगा सौदा है क्योंकि जितना पैसा निकाला उससे 2.5 तक ज्यादा बैंक को चुकाना पड़ सकता है. इसमें ग्राहकों को यह भी पता नहीं चलता कि जैसे ही कार्ड से पैसे निकालते हैं, ब्याज की दर कुछ और लागू हो जाती है. इस स्थिति में ब्याज में छूट की सुविधा नहीं मिलती. ज्यादातर बैंक कैश विड्रॉल पर 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक वसूल लेते हैं.

3-ओवर लिमिट फी

यह आपके क्रेडिट कार्ड के टाइप निर्भर करता है. हर कार्ड के साथ क्रेडिट लिमिट मिलती है जिसमें कुछ बैंक उससे ज्यादा भी खर्च करने की सुविधा देते हैं, कुछ नहीं देते. अगर कोई कार्डहोल्डर लिमिट से ज्यादा खर्च करता है तो बैंक इस पर भारी ब्याज ऐंठते हैं. ज्यादातर बैंकों में इसकी न्यूनतम सीमा 500 रुपये है. यह ओवर लिमिट over limit fee आपके क्रेडिट कार्ड और बैंक पर निर्भर करती है.

4-लेट पेमेंट चार्जेज

क्रेडिट कार्ड के बिल के साथ एक सुविधा ये भी मिलती है कि पूरा आउटस्टैंडिंग अमाउंट नहीं चुका सकते तो मिनिमम अमाउंट जमा करने की छूट मिलती है. अगर कोई ग्राहक मिनिमम अमाउंट भी नहीं चुका पाता है तो बैंक उस पर लेट पेमेंट फी late payment charges लेते हैं. क्रेडिट कार्ड के स्टेटमेंट बैलेंस को देखकर लेट फीस तय होती है. एचडीएफसी के क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट बैलेंस अगर 100-500 के बीच हो तो लेट पेमेंट फी 100 रुपये लगता है. अगर स्टेटमेंट बैलेंस 10,001 रुप्ये से अधिक है तो लेट पेमेंट फी 750 रुपये लगते हैं.

5-इंटरेस्ट रेट

इसे एनुअल परसेंटेज रेट या APR कहते हैं. एपीआर आपके क्रेडिट कार्ड के बिल को प्रभावित करता है. अगर कार्ड के साथ ओवरड्यू पेमेंट बाकी है, तो एपीआर से बहुत घाटा होता है. इसीलिए क्रेडिट कार्ड को कर्ज के जाल में फंसाने वाला कहा जाता है क्योंकि अन्य लोन के मुकाबले इस पर ब्याज की दर कई गुना तक ज्यादा होती है. लेकिन यह तभी होता है जब आप कुल आउटस्टैंडिंग बिल जमा नहीं करते हैं. उदाहरण के लिए क्रेडिट कार्ड का बिल 15,000 का है लेकिन आपने 5000 ही चुकाया तो बाकी बचे 10,000 पर 33-42 परसेंट तक ब्याज लग सकता है.

6-जीएसटी

क्रेडिट कार्ड से जो भी ट्रांजेक्शन होते हैं, उन पर जीएसटी के तहत टैक्स वसूला जाता है. इसलिए सामान खरीदने से पहले टैक्स और उसके स्लैब के बारे में पता कर लें. इसी के साथ जीएसटी एनुअल फी, इंटरेस्ट पेमेंट और ईएमआई पर चुकाए जाने वाली प्रोसेसिंग फी पर 18 परसेंट की दर से वसूला जाता है.

7-फॉरेन करंसी मार्क अप फी

बैंक अकसर कहते हैं कि क्रेडिट कार्ड से इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगता लेकिन ऐसा नहीं होता. बैंक इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन पर फॉरेन करंसी मार्क अप फी foreign currency mark up fee के रूप में चार्ज वसूलते हैं. यह फी अलग-अलग बैंकों में भिन्न हो सकती है. इसके तहत ट्रांजेक्शन अमाउंट का कुछ हिस्सा वसूला जाता है. कोई बैंक ट्रांजेक्शन का 2 परसेंट तो कोई 3.5 परसेंट तक चार्ज लेता है. इन सभी चार्ज के बारे में जानना जरूरी है क्योंकि बैंक अगर क्रेडिट कार्ड पर पैसे काट लें तो आपको पहले से इसका पता होना चाहिए.