राजधानी एक्सप्रेस में ‘तेजस’ का मजा… लाइट और चार्जिंग पॉइंट समेत काफी कुछ पर्सनल, सुविधाएं इतनी कि विदेशों की ट्रेन भी फेल!

 भारतीय रेलवे की ए ग्रेड सर्विस मानी जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में अब देश की पहली प्राइवेट ट्रेन ‘तेजस एक्सप्रेस’ की तरह आनंद मिलेगा. दरअसल, पश्चिम रेलवे की ओर से दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस में तेजस ट्रेन की ही तरह अपग्रेडेड स्मार्ट सुविधाओं से लैस आकर्षक स्लीपर कोच रैक लगाए गए हैं. चमकीले सुनहरे रंग के ये कोच बाहर से जितने शानदार दिखते हैं, अंदर से भी उतने ही स्मार्ट हैं.

इन कोचेस में सुविधाएं इतनी शानदार है जो यात्रियों को बेहतरीन यात्रा का अनुभव देंगी. सोमवार से इस आकर्षक रैक के साथ ट्रेन का परिचालन शुरू हो गया है. पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी (CPRO) सुमित ठाकुर ने बताया कि महाप्रबंधक (GM) आलोक कंसल के मार्गदर्शन में यह इतनी जल्दी संभव हो पाया है.

सीपीआरओ ने बताया कि 02951/52 मुंबई-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल एक्सप्रेस पश्चिम रेलवे की सबसे प्रतिष्ठित और प्रीमियम ट्रेनों में से एक है. इस ट्रेन को नए तेजस टाइप के स्लीपर कोच के साथ बदला गया है. ऐसे दो तेजस टाइप स्लीपर कोच रैक राजधानी एक्सप्रेस के रूप में चलाने के लिए तैयार किए गए हैं. दोनों रैक में से एक विशेष तेजस स्मार्ट स्लीपर कोच शामिल हैं, जो भारतीय रेलवे पर शुरू होने वाला अपनी तरह का पहला कोच है.

…क्योंकि ये आराम का मामला है

नई ट्रेन में यात्री सुरक्षा के साथ उनकी आरामदायक यात्रा के लिए कोच विशेष स्मार्ट फीचर्स से लैस हैं. स्मार्ट कोच का उद्देश्य इंटेलिजेंट सेंसर-आधारित सिस्टम की मदद से यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं प्रदान करना है. यह जीएसएम नेटवर्क कनेक्टिविटी के साथ प्रदान की गई यात्री सूचना और कोच कम्प्यूटिंग यूनिट (PICCU) से लैस है, जो रिमोट सर्वर को रिपोर्ट करता है.

पीआईसीसीयू (Passenger Information and Coach Computing Unit) ट्रेन में लगे सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, टॉयलेट गंध सेंसर, पैनिक स्विच और फायर अलार्म सिस्टम के आउटपुट को रिकॉर्ड करेगा. वायु गुणवत्ता, चोक फिल्टर सेंसर और ऊर्जा मीटर का डेटा भी रिकॉर्ड होगा.

सीपीआरओ ने बताया कि तेजस स्मार्ट कोच के उपयोग के साथ, भारतीय रेलवे का लक्ष्य प्रिवेंटिव मेंटेनेंस की ओर बढ़ना है. यानी ‘समस्या का समाधान करने वाली स्थिति’ की बजाय ‘समस्या पैदा ही न हो’ वाली स्थिति को हासिल करना रेलवे का लक्ष्य है. लंबी दूरी की यात्रा के लिए इस आधुनिक तेजस टाइप स्लीपर ट्रेन की शुरुआत को भारतीय रेलवे द्वारा एक और आदर्श बदलाव बताया जा रहा है.

…ताकि पैसेंजर्स के लिए सफर आरामदायक हो

पैसेंजर्स के आरामदायक सफर के लिए एयर सस्पेंशन बोगियांं लगाई गई हैं. इन कोचों के यात्री आराम और सवारी की गुणवत्ता में सुधार के लिए बोगियों में एयर स्प्रिंग सस्पेंशन लगाया गया है. साथ ही बेयरिंग, व्हील के लिए ऑन बोर्ड कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं. इनमें एकदम आधुनिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाए गए हैं.

इस रैक का इंटीरियर बेहद ही शानदार है. इनमें आग प्रतिरोधी सिलिकॉन फोम वाली सीटें और बर्थ यात्रियों को बेहतर आराम और सुरक्षा प्रदान करते हैं. बोगी के अंदर पूरा अंडर-फ्रेम ऑस्टेनिटिक स्टेनलेस स्टील (एसएस 201 एलएन) का है जो कम जंग के कारण कोच के जीवन को बढ़ाता है.

हर बर्थ के या‍त्री के लिए काफी कुछ पर्सनल

इन बोगियों में हर बर्थ पर प्रत्‍येक यात्री के लिए अलग मोबाइल चार्जिंग पॉइंट है, ताकि मोबाइल या लैपटॉप चार्ज करने के लिए कोई चिकचिक न हो, न ही इंतजार करना पड़े. इसी तरह प्रत्येक यात्री के लिए बर्थ रीडिंग लाइट लगाए गए हैं. ताकि रात में कोई यात्री किताबें पढ़ना चाह रहा हो, तो लाइट के कारण दूसरे यात्री डिस्टर्ब न हों. अपर बर्थ पर चढ़ने के लिए सामान्य बोगियों की अपेक्षा सुविधाजनक व्यवस्था है. खिड़कियों पर पर्दों के बजाय रोलर ब्लाइंड्स दिए गए हैं, ताकि सैनिटाइजेशन में परेशानी न हो.

ट्रेन में ये स्मार्ट सुविधाएं भी होंगी:

  • यात्री उद्घोषणा और सूचना प्रणाली: प्रत्येक कोच के अंदर दो एलसीडी यात्रियों को यात्रा सम्बंधी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे अगला स्टेशन, शेष दूरी, आगमन का अपेक्षित समय, देरी और सुरक्षा सम्बंधी संदेश प्रदर्शित करेंगे.
  • डिजिटल डेस्टिनेशन बोर्ड: फ्लश टाइप एलईडी डिजिटल डेस्टिनेशन बोर्ड प्रत्येक कोच पर प्रदर्शित डेटा को दो पंक्तियों में विभाजित करके स्थापित किया गया है. पहली पंक्ति ट्रेन संख्या और कोच टाइप बताएगी, जबकि दूसरी पंक्ति गंतव्य और मध्यवर्ती स्टेशन के स्क्रॉलिंग टेक्स्ट को कई भाषाओं में प्रदर्शित करती है.
  • सुरक्षा और निगरानी: प्रत्येक कोच में छह कैमरे लगे हैं, जो लाइव रिकॉर्डिंग करते हैं. डे-नाइट विजव वाले सीसीटीवी कैमरे, कम रोशनी की स्थिति में भी चेहरे की पहचान करेंगे. इसमें नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर लगाये गये हैं.
  • ऑटोमेटिक प्‍लग गेट: सभी मुख्य प्रवेश द्वार गार्ड द्वारा कंट्रोल्‍ड हैं. यानी जब तक सभी दरवाजे बंद नहीं हो जाते तब तक ट्रेन शुरू नहीं होती है.
  • फायर अलार्म, डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम: सभी कोचों में ऑटोमैटिक फायर अलार्म और डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं. पेंट्री और पावर कारों में आग लगने का पता चलने पर ऑटोमैटिक अग्नि शमन प्रणाली कार्य शुरू कर देती है. आपातकालीन चिकित्सा या सुरक्षा जैसी आपात स्थिति में टॉक बैक पर बात की जा सकती है.

कई खूबियों वाला अत्याधुनिक टॉयलेट

इस रैक के कोचेस में लगे टॉयलेट भी अत्याधुनिक हैं. इनमें एंटी-ग्रैफिटी कोटिंग, जेल कोटेड शेल्फ, नए डिजाइन का डस्टबिन, डोर लैच एक्टिवेटेड लाइट, एंगेजमेंट डिस्प्ले साथ लगाए गए हैं. इनमें प्रत्येक कोच के अंदर शौचालय ऑक्‍यूपेंसी को स्वचालित रूप से प्रदर्शित किया जाता है. किसी भी आपात स्थिति के लिए शौचालयों में पैनिक बटन लगाया गया है.

प्रत्येक कोच में दो टॉयलेट एनुसिएशन सेंसर इंटीग्रेशन लगे हैं, जो उपयोग के समय ‘शौचालयों में क्या करें और क्या न करें’ के बारे में ऑडियो गाइडलाइन प्रसारित करते रहेंगे. टॉयलेट में बायो-वैक्यूम शौचालय सिस्टम लगा हुआ है. इसमें बेहतर फ्लशिंग के कारण शौचालय में साफ-सफाई बनी रहती है. फ्लश में पानी भी बचता है. पानी की उपलब्‍धता दिखाने के लिए वाटर लेबल सेंसर लगाए गए हैं.