1 साल में इस फंड ने दिया 106 परसेंट का रिटर्न, 500 रुपये की SIP से शुरू कर सकते हैं निवेश

 आज हम बात करते हैं एचडीएफसी स्मॉल कैप HDFC small cap फंड के बारे में. हाल के बरसों में इस फंड ने बड़ा नाम कमाया है. ये नाम हुआ है फंड के रिटर्न देने से. इस स्मॉल कैप फंड ने एक साल की जमा पूंजी पर 106 परसेंट से ज्यादा का रिटर्न दिया है. लेकिन तीन साल में इसका रिटर्न 16 फीसद और 5 साल में 18 परसेंट का रहा है. सालभर में रिटर्न तो वाकई ज्यादा है लेकिन जोखिम का खतरा बहुत है. अगर वही निवेश 3 साल या 5 साल के लिए कर दें तो कम जोखिम के साथ बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट से दुगने ज्यादा रिटर्न का लाभ लिया जा सकता है.

पिछले एक साल का रिकॉर्ड देखें तो स्मॉल कैप फंड ने 70 फीसद के आसपास रिटर्न दिया है. इसी में एक HDFC small cap फंड भी है. हालांकि पिछले तीन साल का आंकड़ा देखें तो स्मॉल कैप फंड में महज 7.47 परसेंट की कमाई हुई है. स्मॉल कैप फंड इक्विटी म्यूचुअल फंड की कैटगरी में आते हैं जो अपना अधिकांश पैसा छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं. यानी कि वैसी कंपनियां जो स्टॉक मार्केट के लिहाज से 251 तक या उससे नीचे वाली होती हैं. ऐसी कंपनियां साइज में छोटी होती हैं और नई होती हैं. इन कंपनियों की कोशिश होती है कि मार्केट में नए-नए प्रोडक्ट लॉन्च कर कमाई की जाए जिससे कि फंड को भी फायदा होता है. ऐसी ही कंपनियां बाद में मिड कैप या लार्ज कैप में तब्दी हो जाती हैं, अगर उनका परफॉर्मेंस उस स्तर का होता है.

HDFC small cap फंड के बारे में

HDFC small cap फंड भी अपना 65 परसेंट पैसा ऐसी ही कंपनियों में लगाता है. इस कंपनी का एयूएम या एसेट अंडर मैनेजमेंट 12,460 करोड़ रुपये का है. यह फंड निफ्टी स्मॉलकैप 100 टोटल रिटर्न इंडेक्स के तहत दर्ज है. इस फंड का नेट एसेट वैल्यू NAV 68.204 रुपये का है. आईडीसीडब्ल्यू 32.631 रुपये है. इसमें न्यूनतम 5,000 रुपये से निवेश कर सकते हैं. कोई ग्राहक चाहे तो न्यूनतम 500 रुपये की SIP से निवेश शुरू कर सकता है. इस फंड के मैनेजर का नाम चिराग सीतलवाड है. इस फंड का पोर्टफोलियो सेक्टर देखें तो पहले स्थान पर सर्विस सेक्टर है जिसमें इस फंड ने 20.42 फीसद पैसा निवेश किया है. दूसरे स्थान पर केमिकल सेक्टर है जिसमें 13.16 परसेंट, तीसरे स्थान पर टेक्नोलॉजी सेक्टर है जिसमें 9.45 परसेंट, चौथे स्थान पर कंस्ट्रक्शन सेक्टर जिसमें 8.07 और अंत में इंजीनियरिंग सेक्टर है जिसमें 7.78 परसेंट का निवेश हुआ है.

किन सेक्टर में लगा HDFC small cap का पैसा

इस फंड का पैसा प्रमुख तौर पर पांच सेक्टर सर्विसेज, केमिकल, टेक्नोलॉजी, कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग में लगा है. यही कारण है कि यह स्मॉल कैप फंड होते हुए भी ग्राहकों को बेहतर रिटर्न दिया है. ये पांचों सेक्टर ऐसे हैं जिनकी मांग हमेशा बनी रहती है. आगे भी बनी रहेगी, भले ही कोरोना या कोई और महामारी आ जाए. ऐसे में भविष्य में इस फंड के और भी विकास करने की संभावना है. कंपनियों की बात करें तो HDFC small cap का सबसे ज्यादा निवेश फायरसोर्स सॉल्यूशन, बजाज इकेक्ट्रिकल्स, सोनाटा सॉफ्टवेयर, परसिस्टेंट सिस्टम और चंबल फर्टिलाइजर एंड केमिकल में लगा है. ये कंपनियों अपने टर्नओवर में भले छोटी हैं, लेकिन इनके मुनाफे का रिकॉर्ड बहुत अच्छा है. इसका फायदा एचडीएफसी स्मॉल कैप फंड को भी बाखूबी मिलता है.

फंड में हुए हालिया बदलाव

अभी हाल में इस फंड में कई बड़े बदलाव हुए हैं. इस फंड में हैथवे केबल और डाटाकॉम जैसी कंपनी का प्रवेश हुआ है. दूसरी ओर, अतुल, जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स, टाइम टेक्नोप्लास्ट जैसी कंपनियां बाहर हुई हैं. फेडरल बैंक, रेडिको खेतान, एलजी बालाकृष्णन, सुपरजीत इंजीनियरिंग, एस्टर डीएम हेल्थकेयर, आईनॉक्स लीजर, गेब्रिएल इंडिया, वर्धमान टेक्सटाइल्स, डीसीबी बैंक और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने निवेश की हिस्सेदारी बढ़ाई है. यह फंड 2008 में शुरू हुआ था, तब से इसने 13 परसेंट से ज्यादा का औसत रिटर्न दिया है.

टैक्स का फंडा

इस फंड के टैक्स का फंडा भी समझ लेते हैं. अगर इस फंड के यूनिट को 12 महीने से पहले बेचते हैं तो उस पर होने वाली कमाई पर शॉर्ट टर्म गेंस के तहत 15 परसेंट का टैक्स लगेगा. अगर आप इसकी यूनिट को 1 साल से ज्चादा तक होल्ड करते हैं तो उस पर होने वाली कमाई पर भी टैक्स लगेगा. इस पर लॉन्ग टर्म गेंस के तहत 10 परसेंट का टैक्स लगेगा. ध्यान रहे कि यह 10 परसेंट का टैक्स तभी लगेगा जब एक साल में इस फंड से 1 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की गई हो.

निवेश करें या नहीं

यह फंड छोटी कंपनियों में पैसा लगाता है, इसलिए इसमें जोखिम बहुत है. लॉन्ग कैप और मिड कैप फंड की तुलना में स्मॉल कैप फंड में उता-चढ़ाव ज्यादा होता है. यह फंड उन लोगों के लिए सही माना जाता है जो अपना पैसा छोटी कंपनियों में लगाना चाहते हैं. आप जो भी पोर्टफोलियो बनाते हैं, उसमें स्मॉल कैप फंड का निवेश कम होना चाहिए क्योंकि बाजार में कोई भी बड़ी घटना होने पर इसमें शामिल छोटी कंपनियों के शेयरों के बिकने में दिक्कत आती है.