Euro 2020 Italy vs England Final Preview: खत्म होगा इंग्लैंड का इंतजार या इटली की धार देगी मार, बादशाहत का फैसला आज

 रेफरी की सीटी बजने वाली है. हजारों दर्शकों के शोर के बीच किक-ऑफ होने ही वाला है. 22 खिलाड़ियों और करोड़ों दिलों के लिए सबसे अहम 90 मिनट या 120 मिनट की काबिलियत और जज्बातों की जंग शुरू होने ही वाली है. बस थोड़ा वक्त और… कई ऐतिहासिक मैचों और अलग-अलग इवेंट्स का गवाह बन चुका लंदन के शानदार वेम्बली स्टेडियम (Wembley Stadium) में रविवार 11 जुलाई की रात एक बार फिर इतिहास बनेगा और ये इतिहास बनता देखेंगे दुनियाभर के करोड़ों लोग, क्योंकि आमने-सामने होंगी इटली और इंग्लैंड (Italy vs England) की फुटबॉल टीमें और दांव पर होगा यूरोपियन चैंपियन का खिताब- यूएफा यूरो 2020 (UEFA Euro 2020).

एक महीने तक हुए रोमांचक और हैरतअंगेज फुटबॉल के बाद अब आखिरी पड़ाव आ गया है, जिसके बाद अगले 3 साल तक इन दोनों में से किसी एक टीम को यूरोपियन चैंपियन से संबोधित किया जाता रहेगा. 2022 में विश्व चैंपियन भी बन गए, तो अलग बात है. लेकिन फिलहाल बात सिर्फ यूरो कप की. इस फाइनल में आमने-सामने हैं दो ऐसी टीमें, जिन्होंने टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया. इटली ने तो बल्कि अपने सारे मैच जीते ही हैं, जबकि इंग्लैंड ने ग्रुप स्टेज में एक ड्रॉ खेला था. लेकिन पिछले मैचों में क्या हुआ, उसके अब कोई मायने नहीं. अब जो है, इसी रात है.

दोनों ही टीमों के लिए ये फाइनल कई मायनों में खास है. दोनों का यहां तक पहुंचने का सफर भी बेहद खास है. इंग्लैंड के लिए पिछले 55 सालों के इंतजार और अपमान को मिटाने का ये एक मौका है, तो इटली के सामने अवसर है फाइनल की पिछली असफलताओं को हमेशा के लिए नजरों से दूर करना. इंग्लैंड ने 2018 विश्व कप सेमीफाइनल में एक मौका गंवाया था, तो इटली उस विश्व कप में दस्तक भी नहीं दे पाया था. ये दर्द दूर करना भी इन दोनों टीमों की योजनाओं का हिस्सा है.

55 साल का इंतजार, अपमान और दर्द हो सकेगा खत्म?

इंग्लैंड के लिए ये फाइनल इसलिए खास है क्योंकि 1966 में विश्व कप जीतने के बाद वह पहली बार किसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा है. यूरो में तो पहली ही बार. अक्सर विश्व कप या यूरो कप में क्वार्टर फाइनल या सेमीफाइनल में ही पस्त होने वाली इंग्लिश टीम ने यहां तक पहुंचने के लिए दो सबसे बड़ी बाधाओं को पार किया- पहला, जर्मनी को हराना, जो उसकी राह में हमेशा रोड़ा रहा है. दूसरा, नॉकआउट के दबाव से निपटना.

इंग्लैंड ने इन दोनों ही मामलों में इस बार जबरदस्त प्रदर्शन किया है. अंतिम-16 में उसने जर्मनी को 2-0 से मात दी और यहीं से उसका खेल लगातार बेहतर होता गया. ऐसा लगता है कि ग्रुप स्टेज की सुस्त इंग्लिश टीम गुजरे जमाने की बात है. टीम के कप्तान हैरी केन ने पिछले दो मैचों में कहर बरपाया है. रहीम स्टर्लिंग इस टूर्नामेंट में टीम के सबसे बड़े स्टार साबित हुए हैं.

टीम के डिफेंस की भी तारीफ करनी जरूरी है. ये डिफेंस ऐसा है, कि अभी तक खेले 6 मैचों में सिर्फ 1 गोल खाया है. टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 5 क्लीन शीट इंग्लैंड की रही हैं. जाहिर तौर पर ये सारे पहलू टीम को फाइनल में मजबूती देते हैं. साथ ही, इंग्लैंड के पास फायदा है घरेलू मैदान का, जहां भारी संख्या में घरेलू फैंस होंगे. फिर वेम्बली का इतिहास भी इंग्लैंड के पक्ष में है.

दीवार जैसे डिफेंस को मिला धारदार अटैक, बन गई बात

इटली इस टूर्नामेंट की सबसे शानदार टीम साबित हुई है. रॉबर्टो मनचिनी ने पिछले 2-3 साल में इस टीम को पूरी तरह बदल दिया है. 2018 विश्व कप के लिए क्वालिफाई न कर पाने जैसा अपमान का घूट पीने वाले यूरोप के इस फुटबॉल पावरहाउस ने अपनी खोई ताकत हासिल की है और उसके सामने अभी तक कोई नहीं टिका है. लगातार 33 मैचों में अजेय- या तो जीत या ड्रॉ. हार का नामो-निशान तक नहीं.

हमेशा से अपने मजबूत डिफेंस के लिए मशहूर इटली की टीम इस बार भी इस मोर्चे पर एकदम टाइट है. ज्यॉर्जियो कीलीनी और लियोनार्डो बोनुची जैसे उम्रदराज लेकिन दीवार जैसे मजबूत डिफेंस लाइन को भेद पाना किसी करिश्मे से कम नहीं है. लेकिन इटली की ताकत बढ़ी है अटैक में धार आने से. चीरो इममोबिले, लॉरेन्जो इनसिनिया, फेडरिको किएजा और मैन्युएल लोकाटेल्ली जैसे अटैकरों ने विरोधी गोलपोस्ट पर सटीक निशाने साधे हैं और सफलता हासिल की है.

1968 की सफलता को दोहराने का मौका

ऐसे खिलाड़ियों से के दम पर 2000 और 2012 का फाइनल हारने वाली इटली के पास पुराने सारे टूटे सपनों को पूरा करने का मौका है. साथ ही मौका है 1968 की सफलता को दोहराने का. तब इटली ने अपना इकलौता यूरोपियन खिताब जीता था. जाहिर तौर पर टूर्नामेंट के दो सबसे बेहतरीन डिफेंस और अटैक के अच्छे संतुलन वाली टीमों की टक्कर फाइनल मुकाबले के काबिल है.