MP by Elections : बीजेपी-कांग्रेस सहानुभूति की लहर पर सवार होने के लिए तैयार, टिकट के लिए इन नामों की चर्चा

 भोपाल. मध्य प्रदेश में चार सीटों पर उपचुनाव (By Elections) होना है. इनमें खंडवा लोकसभा सीट (Khandwa Loksabha seat) सहित रैगांव, पृथ्वीपुर और जोबट विधानसभा की सीटें शामिल हैं. पृथ्वीपुर और जोबट कांग्रेस और बाकी दो सीटों पर बीजेपी का कब्जा था. इन चारों सीटों पर कोरोना संक्रमण के कारण नेताओं की मौत हुई. अब दोनों ही सियासी दल सहानुभूति के वोट बटोरने के प्लान में जुटे हैं. दोनों तरफ से प्रबल दावेदारों के नाम सामने आए हैं. उससे साफ है कि उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही सहानुभूति के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश में हैं.


चार सीटों के सियासी समीकरण पर नजर डालें तो खंडवा लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा था. यहां से 2019 के चुनाव में नंदकुमार सिंह चौहान चुनाव जीते थे और अब बीजेपी की कोशिश है कि उपचुनाव में नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्षवर्धन को टिकट दिया जाए।.हालांकि यहां पर बीजेपी में अर्चना चिटनिस और कृष्ण मुरारी मोघे भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं.


रैगांव का सियासी समीकरण
वही रैगांव विधानसभा सीट पर 2018 के चुनाव में जुगल किशोर बागड़ी ने चुनाव जीता था और बीजेपी यहां पर बागड़ी के बड़े बेटे पुष्पराज को टिकट देने की तैयारी में है. टिकटों को लेकर बीजेपी में अभी मंथन का दौर जारी है. मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा हर बार सहानुभूति के सहारे चुनाव लड़ना सफल साबित नहीं होता है. आगर सीट इसका उदाहरण है. लेकिन फिर भी यह देखा जाता है कि चुनाव में सहानुभूति अपना असर दिखाती है. पार्टी सभी पहलुओं पर मंथन करने के बाद ही टिकट फाइनल करेगी.

कांग्रेस में जोड़तोड़
अब कांग्रेस के कब्जे वाली 2 विधानसभा सीटों की बात करें तो 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने पृथ्वीपुर और जोबट विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था. पृथ्वीपुर सीट पर बृजेंद्र सिंह राठौर ने जीत हासिल की थी. उनके निधन के बाद कांग्रेस पार्टी बृजेंद्र सिंह राठौर के बेटे नितेंद्र सिंह राठौड़ को उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है. इसके अलावा जोबट विधानसभा सीट पर कलावती भूरिया के रिश्तेदार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विक्रांत भूरिया को टिकट देने की तैयारी में हैं. पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने कहा पार्टी सभी पहलुओं पर विचार कर रही है. हो सकता है, जिन सीटों पर पार्टी का कब्जा था उसी परिवार के सदस्य को उपचुनाव में पार्टी अपना उम्मीदवार बनाए.

सहानुभूति वोट पर नजर
भले ही उप चुनाव की तारीखों का ऐलान ना हुआ हो लेकिन यह तय है उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस कांग्रेस दोनों का भरोसा सहानुभूति से मिलने वाले वोटों पर होगा.