जानिए कैसे काम करता है नकली नोटों और स्मगलिंग के खिलाफ मुहिम चलाने वाला इकलौता गैर सरकारी फोरम- FICCI CASCADE

 आज दुनिया भर में चल रहे गैरकानूनी व्यापार धंधे जिसमें स्मगलिंग और नकली नोटों से हेर फेर शामिल हैं वो फल फूल रहे कई बिलियन डॉलर के गैरकानूनी उद्योग का हिस्सा बन गए हैं. सब जानते हैं कि इसका दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर कितना बुरा असर पड़ रहा है. एक अनुमान के मुताबिक ये गैरकानूनी धंधे दुनिया की सबसे बड़े उद्योग के रुप में विकसित हो रहे हैं. कई स्टडीज में भी ये माना गया है कि ये व्यापार साढ़े छह सौ मिलियन डॉलर से लेकर 3 ट्रिलियन डॉलर के बीच है. ये गोरखधंधा दुनिया भर के व्यापार का 10 फीसदी हिस्सा बन चुका है और अमेरिका की एजेंसी एफबीआई की माने तो ये 21वीं सदी का सबसे बड़ा अपराध बन चुका है. इसका बुरा असर न सिर्फ दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है बल्कि इससे अंडरग्राउंड गतिविधियों के साथ साथ अपराधिक गतिविधियां भी कंट्रोल होने लगती हैं. इस समानांतर अर्थव्यवस्था से सरकारों को राजस्व और टैक्स का नुकसान झेलना पड़ रहा है जिससे जनहित के कामों पर असर पड़ता है और टैक्स भरने वालों पर भी ज्यादा बोझ बढ़ता चला जा रहा है, साथ ही आम लोगों को खतरनाक और बेकार सामान पहुंच रहे हैं.


इन पर शिकंजा कसने के लिए दुनियाभर की सरकारें कड़े कानून बना रहीं है और पूरी ताकत भी झोक रही हैं. सरकार की इन्ही कोशिशों में साथ देने के लिए भारत में पहली बार एक गैर सरकारी संस्था ने पहल की है. भारत के एक बिजनेस चैंबर फिक्की (FICCI) ने इस गोरखधंधे से जुझने में सरकार को सहयोग देने के लिए कास्केड (CASCADE) नाम का फोरम बनाया है. कास्केड CASCADE मतलब Committee Against Smuggling & Counterfeting Activities Destroying the Economy जिसकी स्थापना जनवरी 2011 में की गयी थी. अब इस फोरम के अध्यक्ष अनिल राजपूत हैं जो उद्योग जगत से ही संबंध रखते हैं औऱ वर्तमान में आईटीसी कंपनी में कॉरपोरेट मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य भी हैं. अनिल राजपूत का कहना है कि इन गैरकानूनी धंधों की आय अब ज्यादातर टेरर फंडिंग के लिए होने लगी है. इसलिए हम सरकार और उद्योग जगत सभी को इस रिश्तें को समझने की जरुरत है ताकि दुनिया भर में इसके पड़ रहे असर को दूर किया जा सके.


ये फोरम अपना पूरा ध्यान और रिसर्च इस बात पर कर रहा है कि कैसे दुनिया भर में चल रहे इस गैरकानूनी धंधे से मुक्ति पाई जाए. कास्केड स्मगलिंग से जुड़े गैर कानूनी धंधों से जुड़े इन मुद्दों पर जोर लगा रहा है


  • इससे कानून के दायरे में रह कर काम कर रहे उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ता है.

  • उपभोक्ता के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर खतरा मंडराता रहता है.

  • गैरकानूनी उद्योग पनप रहे हैं.

  • सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है.

  • आम आदमी के वेलफेयर का बोझ और एजेंसियों पर होने वाला खर्च भी बेतहाशा बढ़ रहा है.

  • काले धन की संख्या बढ़ती जा रही है.

  • अपराध बढ़ता जा रहा है.


यही फिक्की कास्केड अपनी भूमिका निभा रहा है. ये फोरम उद्धोग जगत, उपभोक्ताओं, मीडिया, कानूनी विशेषज्ञों, उपभोक्ता फोरमों, नीति बनाने वालों के साथ मिलकर जागरूकता बढ़ाने का काम करने में जुटा है. ये अपनी रिसर्च और स्टडीज और एनालिसिस के जरिए सबको ये बता रहा है कि कि ये गोरखधंधा कैसे उपभोक्ताओं, आम लोगों की सुरक्षा और टैक्स की चोरी को बढ़ावा दे रहा है. कास्केड के अध्यक्ष अनिल राजपूत कहते हैं कि ये कि ये गैरकानूनी व्यापार देश के सबसे खतरनाक दुश्मनों में से एक है. इसका एक बड़ा कारण है हमारी खुद की नीतियां जिसमें खामी निकाल कर काला धंधा करने वाले लोग न सिर्फ सिस्टम में घुस गए हैं बल्कि फायदा भी उठा रहे हैं.

यहीं पर फिक्की कास्केड का रोल उभर कर सामने आने लगा है. इस फोरम ने चार बिंदू चुने हैं जिन्हें आधार बना कर ये जागरुकता बढ़ा रहे हैं. इसमें पहला है जागरुकता बढ़ाना और कानून का पाल कराने वाली एजेंसियों के लिए दुनिया भर से इनपुट लाना. ये फोरम पूरी तरह से रिसर्च में लगा है और पुराने पड़ चुके कानूनों और एजेसियों मे कैसे सुधारों की जरुरत है इसके बारे में नीति निर्धारकों को बता रहा है. कास्केड देश के बड़े नीति निर्धारकों के साथ दुनिया भर में अपनायी जाने वाली बेस्ट प्रैक्टिसों की जानकारी भी बांट रहा है. जाहिर है जब मोदी सरकार काले धन और काले धंधे के खिलाफ अपनी लड़ाई मुकाम तक पहुंचाने की कोशिशों में लगी है तो ऐसे फोरम उनके खासे मददगार साबित हो रहे हैं.