201 साल पहले क्रिकेट का पहला दोहरा शतक जमाया, लॉर्ड्स को तबाही से बचाया, सांसद के साथ बैंकर भी रहा ये क्रिकेटर

 क्रिकेट इतिहास में आज के दिन की खास अहमियत है, क्योंकि आज ही के दिन यानी 24 जुलाई को एक ऐसे शख्स का जन्म हुआ, जिसने न सिर्फ रिकॉर्ड कायम किए, बल्कि इस खेल के सबसे प्रसिद्ध और सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले मैदान के अस्तित्व को बचाए रखा. ये सबकुछ सदियों पुरानी घटनाएं हैं, लेकिन इनका असर आज भी खेल पर है और यही कारण है कि इस शख्स को भुलाया नहीं जा सकता. क्रिकेट के मैदान से लेकर संसद तक अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी और अलग-अलग भूमिकाओं को निभाते हुए अपना जीवन बिताया. ये क्रिकेटर थे इंग्लैंड के विलियम वार्ड (William Ward). एक बल्लेबाज, जिसने 201 साल पहले क्रिकेट इतिहास का पहला दोहरा शतक ठोका था और रिकॉर्ड कायम किया था, जो कई सालों तक बरकरार रहा था.

विलियम वार्ड का जन्म आज के ही दिन यानी 24 जुलाई 1787 को लंदन के इस्लिंगटन में हुआ था. विलियम के पिता मशहूर व्यापारी थे. वार्ड ने हैंपशर के विन्चेस्टर कॉलेज से अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी की और क्रिकेट उतरने से पहले बेल्जियम के एंटवर्प में फाइनेंस की पढ़ाई और विदेशी मुद्रा से जुड़े मामलों की ट्रेनिंग हासिल की थी. क्रिकेट के मामले में उनकी शुरुआत 1810 में हुई जब उन्होंने सरे के खिलाफ इंग्लैंड की टीम की ओर से पहला फर्स्ट क्लास मैच लॉर्ड्स (Lord’s) के मैदान में खेला था. इसके बाद उन्होंने कई बार क्रिकेट की पिच पर कदम रखा और अपना दम दिखाया.

क्रिकेट इतिहास का सबसे पहला दोहरा शतक

क्रिकेट करियर शुरू करने के 10 साल बाद वार्ड के करियर और क्रिकेट इतिहास का सबसे अच्छा और यादगार पल आया था. मजेदार बात ये है कि इस यादगार पल की शुरुआत भी 201 साल पहले इसी तारीख, 24 जुलाई 1820 को हुई थी, वार्ड के 33वें जन्मदिन पर. ये इतिहास लिखा गया था उसी लॉर्ड्स मैदान पर, जिसे उन्होंने कुछ साल बाद बचाया था. मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) की ओर से खेलते हुए नोरफॉक के खिलाफ वार्ड ने क्रिकेट इतिहास का पहला दोहरा शतक जमाया था.

24 जुलाई से शुरू हुए इस मैच में वार्ड ने तीन दिन बैटिंग की और 278 रनों की ऐतिहासिक रिकॉर्ड पारी खेली थी. वह तीसरे दिन आउट हुए. ये फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका पहला ही शतक था.

वार्ड का ये रिकॉर्ड 56 साल तक कायम रहा. क्रिकेट के पितामह माने जाने वाले डब्ल्यूजी ग्रेस ने 1876 में केंट के खिलाफ 344 रनों की पारी खेलकर ये रिकॉर्ड तोड़ा था और पहला तिहरा शतक जमाया था. वहीं लॉर्ड्स के मैदान पर सबसे बड़ी पारी का वार्ड का ये रिकॉर्ड 105 साल तक कायम रहा. 1925 में यॉर्कशर के पर्सी होम्स ने मिडिलसेक्स के खिलाफ 315 रनों की पारी खेल ये रिकॉर्ड तोड़ा था.

लॉर्ड्स को बर्बादी से बचाया

अगर लॉर्ड्स में वार्ड ने 1820 में एक रिकॉर्ड बनाया, तो इसके 5 साल बाद ही उन्होंने इस ऐतिहासिक मैदान को बचाकर आज के दौर की नींव रखी. इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर थॉमस लॉर्ड, जिन्होंने लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान को बनाया था और उसके मालिक थे, इस मैदान को बेचना चाहते थे, क्योंकि उनकी कमाई नहीं हो रही थी. 1825 में वह इसे बिल्डिंग निर्माण के लिए कुछ लोगों के समूह को बेचने की तैयारी में थे, लेकिन तब विलियम वार्ड, जो खुद एक बैंकर थे, उन्होंने इस मैदान का बचाने की ठानी. वार्ड ने 5000 ब्रिटिश पाउंड की रकम चुकाकर लॉर्ड्स की लीज हासिल की और इस तरह क्रिकेट का सबसे मशहूर मैदान तबाही से बच पाया. इस एक कदम से विलियम वार्ड लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम समेत इस खेल के इतिहास के सबसे अहम शख्सियतों में शुमार हो गए.

बैंकर, सांसद और क्रिकेटर

क्रिकेट के अलावा विलियम वार्ड बैंकर भी थे. फाइनेंस और बैंकिंग के क्षेत्र में उन्हें महारत हासिल थी और यही कारण है कि 1817 में सिर्फ 30 साल की उम्र में उन्हें बैंक ऑफ इंग्लैंड का निदेशक बना दिया गया. कुछ साल बाद 1826 में वह लंदन के सांसद बनकर ब्रिटिश संसद तक पहुंचे. इस दौरान 1830 में उन्होंने भारत में शासन चला रही ईस्ट इंडिया कंपनी के काम काज की जांच करने वाली कमेटी की अध्यक्षता भी की. वार्ड का निधन 30 जून 1849 को लंदन में हुआ. वार्ड ने करीब 35 साल तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला और इस दौरान 130 मैचों का हिस्सा रहे. इसमें उन्होंने 3 शतक और 50 अर्धशतकों की मदद से 4 हजार से ज्यादा रन बनाए. इसके अलावा उन्होंने 49 विकेट भी झटके.