Tokyo Olympics में सिल्वर मैडल जितने के बाद मीराबाई चानू ने कही दिल छु लेने वाली बात, जानकर हर भारतीय को होगा गर्व

मीराबाई चानू: रियो की उस नाकामी के बाद टोक्यो ओलंपिक में धमाल की कहानी -  BBC News हिंदी

देश के करोड़ों खेल प्रेमियों के चेहरे पर खुशी लाने वालीं वेटलिफ्टर मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में रजत पदक जीतने के बाद कहा कि वह इस खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकती हैं. वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक का भारत का दो दशक से जारी इंतजार शनिवार को मीराबाई ने खत्म किया जब 49 किग्रा वर्ग में रजत जीता. मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक जीतने वाली कर्णम मल्लेश्वरी के बाद देश की दूसरी महिला खिलाड़ी बन गईं.

ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में सिल्वर जीतने वाली पहली भारतीय बनीं मीराबाई ने न्यूज 18 लोकमत से एक खास इंटरव्यू में कहा, ‘मैं शब्दों में इसे बयां नहीं कर सकती कि कितना खुश महसूस कर रही हूं. मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है, यह वेटलिफ्टिंग में हमारा दूसरा पदक है. मैं महासंघ, मेरे कोच, परिवार और सभी समर्थकों को धन्यवाद देना चाहती हूं.’

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मणिपुर की मीराबाई ने आगे कहा कि उनका लक्ष्य टोक्यो खेलों में पदक जीतना था और इसलिए उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए कड़ा संघर्ष किया. उन्होंने कहा, ‘मैंने इसके लिए काफी मेहनत की है और संघर्ष किया, बहुत कुछ बलिदान भी किया. टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतना ही मेरा लक्ष्य था. यह मेरे सपने के सच होने जैसा है.’ मीराबाई की जीत पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी दिग्गज हस्तियों ने उन्हें बधाई भी दी.

पीएम मोदी ने तो मीराबाई से फोन पर बात भी की और उन्हें इस जीत की बधाई दी. उनकी जीत पर कोच विजय कुमार भी बेहद खुश हैं. विजय ने उम्मीद जताई कि यह पदक वेटलिफ्टिंग के भविष्य में देश के लिए पदक लाने के लिए और कई खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा. विजय ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि यह पदक इस खेल में हिस्सा लेने के लिए और अधिक खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा. भविष्य में हमारे पास और ओलंपिक पदक होंगे.’

विजय ने साथ ही खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को भी धन्यवाद दिया जिसकी मदद से ओलंपिक से पहले मीराबाई को ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजा गया. उन्होंने कहा, ‘मंत्रालय और SAI ने हमें प्रतियोगिता से पहले प्रशिक्षण के लिए अमेरिका भेजा. कोरोना वायरस के कारण परिस्थितियां ट्रेनिंग के लिए सही नहीं थी और इसलिए हम वहां गए जिससे काफी मदद मिली.’ कोच ने कहा कि उनकी उम्मीदें स्वर्ण जीतने की थी लेकिन वह इस प्रदर्शन से काफी खुश हैं. उन्होंने कहा, ‘हम सोने के लिए खेलना चाहते थे लेकिन हम प्रदर्शन से खुश हैं. हम सभी खुश हैं कि टोक्यो में हमारे देश का पहला पदक भारोत्तोलन के से आया है.’