क्रिकेट के बदले नियम, जब छक्‍का लगाने पर बल्‍लेबाज को मिले 8 रन, टीम इंडिया रही सबसे फिसड्डी

 क्रिकेट प्रशंसकों को सबसे ज्‍यादा दिलचस्‍पी होती है जब क्रिकेट के खेल में नए नियम शामिल किए जाते हैं. उन्‍हें ये देखना होता है कि आखिर किसी मैच में नए नियम किस तरह काम करते हैं और खेल पर उनका असर किस तरह का होता है. वैसे क्रिकेट की सर्वोच्‍च संस्‍था यानी अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट परिषद भी इस खेल को नया कलेवर देने के लिए नियमों में बदलाव करती रहती है ताकि लोगों की दिलचस्‍पी बनी रह सके. इसी कड़ी के तहत जब क्रिकेट मैच में प्‍लेइंग इलेवन की जगह प्‍लेइंग-8 को उतारा गया और छक्‍का लगने पर छह की जगह आठ रन दिए गए तो क्रिकेट फैंस ने इसका जमकर लुत्‍फ उठाया. हालांकि भारतीय टीम इन नए नियमों से तालमेल नहीं बैठा सकी और उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा.

दरअसल, बात क्रिकेट इतिहास के सबसे पहले सुपर-8 टूर्नामेंट (Super-8 Tournament) की हो रही है जिसका आयोजन मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में किया गया. ये टूर्नामेंट साल 1996 में खेला गया था. इसमें खिलाडि़यों की प्‍लेइंग इलेवन भी बदली हुई थी. आमतौर पर प्‍लेइंग 11 में 11 खिलाड़ी होते हैं लेकिन इस टूर्नामेंट 8-8 खिलाडि़यों की टीमें बनाई गईं. इतना ही नहीं, ओवरों की संख्‍या में घटाई गई. टूर्नामेंट के मैच 20 ओवरों के नहीं थे, बल्कि इन्‍हें 14-14 ओवरों का कर दिया गया था.

ऑस्‍ट्रेलिया ए ने जीता टूर्नामेंट, भारतीय टीम को मलेशिया से भी मिली मात

खिलाडि़यों के लिए भी ये टूर्नामेंट एकदम नया था और उनके लिए ये एक रोमांच की तरह था. सबसे खास बात तो ये थी कि इस मैच में किसी खिलाड़ी के छक्‍का लगाने पर उसे छह रन नहीं बल्कि आठ रन दिए गए. साथ ही जो बल्‍लेबाज मैच में 50 रन के आंकड़े तक पहुंच जाता उसे रिटायर्ड होना होता. इन दिलचस्‍प नियमों के साथ ऑस्‍ट्रेलिया ए ने पहला सुपर-8 टूर्नामेंट अपने नाम कर इतिहास रचा. इस टीम में एडम गिलक्रिस्‍ट सरीखा दमदार विकेटकीपर बल्‍लेबाज भी था तो इसकी कप्‍तानी का जिम्‍मा डैरेन लेहमैन ने उठा रखा था. भारतीय क्रिकेट टीम को इस टूर्नामेंट में एक भी अंक हासिल नहीं हो सका. यहां तक कि उसे मलेशिया एकादश के खिलाफ भी हार का सामना करना पड़ा. लेकिन आपको बता दें कि मलेशिया एकादश भी कोई कमजोर टीम नहीं थी, बल्कि सनत जयसूर्या और अरविंद डिसिल्‍वा भी इसी टीम की ओर से ये टूर्नामेंट खेल रहे थे.