Sawan 2021 : क्या आपको पता है भगवान शिव की पूजा के सारे नियम, जानें श्रावण मास में शिव साधना से जुड़ी 15 बड़ी बातें

 शिव कृपा दिलाने वाला श्रावण मास आज 25 जुलाई से प्रारंभ होकर 22 अगस्त तक रहेगा. इस साल सावन के महीने कुल चार सोमवार मिलेंगे. शीघ्र ही प्रसन्‍न हो जाने वाले भगवान शंकर की साधना के लिए श्रावण मास को सबसे उत्‍तम बताया गया है. भगवान शिव जिन्हें भोले, शंकर, गंगाधर, नीलकंठ आदि के नाम से पूजा जाता है, उनकी पूजा के नियम अत्यंत ही सरल है. ऐसे में शिव के साधक को भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में भय से रहित होकर भोलेनाथ को अपना इष्ट देवता मानते हुए विशेष रूप से पारदेश्वर शिवलिंग की पूजा अर्चना करनी चाहिए. सभी शिवलिंगों में पारदेश्वर शिवलिंग को सर्वश्रेष्ठ माना गया है. यदि पारदेश्वर शिवलिंग उपलब्ध न हो तो पास के किसी मंदिर में जाकर विधिविधान से शिव का पूजन एवं अभिषेक करें.

  1. भगवान शिव की पूजा में साधक को ललाट पर लाल चंदन का त्रिपुण्ड और बाहों पर भस्म अवश्य लगाना चाहिए.
  2. सावन के महीने में भगवान ​शिव की साधना में साधक को चाहिए कि वह शुद्धरुद्राक्ष माला से ही शिव का मंत्र जपे.
  3. भगवान शिव की पूजा में सफेद फूलधतूरे का फूल और तीन पत्तियों वाला बेलपत्र को उलट कर दूध से मिले हुए जल की धारा के साथ अर्पित करना चाहिए.
  4. भगवान शिव की साधना करने के लिए बहुत सारे मंत्र हैंलेकिन उनमें सबसे सरल पंचाक्षरी मंत्र ओम नमशिवाय” मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए.
  5. भगवान शिव की पूजा में संभव हो तो सिले हुए वस्त्र पहन कर पूजा न करें और हमेशा शुद्ध आसन पर बैठकर ही पूजा करें.
  6. भगवान शिव की पूजा करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व या उत्तर की तरफ होना चाहिए.
  7. शिव की पूजा करते समय अपने शरीर पर भस्मत्रिपुण्ड और रुद्राक्ष की माला धारण करें.
  8. भगवान शिव की पूजा में तिल का प्रयोग नहीं करना चहिए.
  9. भगवान शिव को चढ़ाए जाने वाले बिल्व पत्र में चक्र और वज्र नहीं होने चाहिएअक्सर बेल के पत्तों में कीड़ों से बनाया एक सफेद सा चिन्ह बन जाता हैऐसे बेलपत्र को कभी भूलकर भी भगवान शिव को न चढ़ाएंइसी तरह बेलपत्र की डंठल की ओर जो मोटा सा भाग होता हैवह वज्र कहलाता हैऐसे में हमेशा उसे पीछे की तरफ का हिस्सा यानि वज्र को ​तोड़कर निकाल दें.
  10. भगवान शिव की पूजा के लिए हमेशा आक का फूल और धतूरे को चढ़ाने के लिए प्रयोग करेंयदि संभव हो तो नील कमल विशेष रूप से चढ़ाएंअन्यथा सामान्य कमल का फूल भी चढ़ा सकते हैंइसी तरह कुमुदिनी या फिर कहें कमलिनी का फूल भी आप शिव की पूजा में चढ़ा सकते हैं.
  11. भगवान शिव की पूजा में उनकी प्रिय वस्तु यानि भांग का भोग अवश्य लगाना चाहिए.
  12. शिवलिंग को स्पर्श किया हुआ भोग ग्रहण नहीं करना चाहिएबाकी अन्य भोग और प्रसाद को आप ग्रहण कर सकते हैं.
  13. भगवान शिव की पूजा के दौरान कभी भी उनकी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती हैजिधर से चढ़ा हुआ जल निकलता हैकभी भी उस नाली को नहीं डांका जाता हैवहां से प्रदक्षिणा उलटी की जाती है.
  14. भगवान शिव की पूजा में कुटजनागकेसरबंधूकमालतीचंपाचमेलीकुंदजूहीकेतकीकेवड़ा आदि फूल नहीं चढ़ाए जाते हैं.
  15. हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि भगवान शिव की पूजा के समय करताल नहीं बजाया जाता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)