Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध में चीन की क्या थी भूमिका? जानें भारत-पाकिस्तान में से किस मुल्क के साथ था ‘ड्रैगन’

 कारगिल युद्ध (Kargil War) में भारत को मिली जीत को 22 साल पूरे हो गए हैं. इस अवसर पर हर साल 26 जुलाई को देश में कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) मनाया जाता है. माना जाता है कि पाकिस्तान (Pakistan) के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की जानकारी के बिना तत्कालीन पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) द्वारा संघर्ष को अंजाम दिया गया था. हालांकि, पाकिस्तान अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया और भारतीय सेना के शूरवीरों ने उसे धूल चटाते हुए 26 जुलाई को अपनी सभी चौकियों को वापस हासिल कर लिया.

इस युद्ध में चीन की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं. इस बात की चर्चा होती है कि चीन ने पिछले दरवाजे से कुछ ऐसी हरकतें कि जिससे ये बात जाहिर होती है कि उसने पाकिस्तान को मदद पहुंचाने की कोशिश की थी. हालांकि, चीन हमेशा से कहता आ रहा है कि वह स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और किसी देश के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता है. लेकिन पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते और फिर भारत के साथ पिछले विवाद को देखते हुए ‘ड्रैगन’ की बातों पर यकीन करना मुश्किल लगता है. ऐसे में आइए जाना जाए कारगिल युद्ध के दौरान चीन की क्या भूमिका (China role in Kargil war) रही.

1999 के दौरान चीन ने लद्दाख में पेट्रोलिंग गतिविधियों को बढ़ाया

चीन ने लगातार दावा किया है कि वह एक ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ का पालन करता है और पाकिस्तान के साथ इसके रिश्ते (China-Pakistan Relations) भारत को प्रभावित नहीं करते हैं. हालांकि, कारगिल युद्ध के दौरान चीन (China in Kargil War) की हरकतों से उसके असल मंसूबों का पता चलता है और पाकिस्तान के साथ उसकी साठ-गाठ उजागर होती है. भले ही चीन ने लगातार इस बात को कहा कि उसकी विदेश नीति की वजह से भारत पर प्रभाव नहीं पड़ता है. मगर चीन ने 1999 के दौरान ही लद्दाख (Ladakh) में कई जगहों पर पेट्रोलिंग गतिविधियों की शुरुआत की.

चीन की इन तीन हरकतों से मिलती है उसके कारगिल युद्ध में भूमिका की जानकारी

पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) के डेमचोक (Demchok) में चीन ने सबसे पहले पेट्रोलिंग गतिविधियों को बढ़ाने की शुरुआत की. बताया गया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 70 पेट्रोल पार्टियां 6 जून 1999 को डेमचोक के सामने पहुंची. इसी दौरान भारत ने कारगिल में ऑपरेशन की शुरुआत कर दी थी.

इसके बाद बीजिंग ने लद्दाख के ट्रिग हाइट्स (Trig Heights) में 1999 में जून के आखिरी हफ्ते में गतिविधियां बढ़ाना शुरू किया. यहां पर चीनियों ने एक प्राकृतिक सतह ट्रैक का निर्माण शुरू किया. इस कदम का आकलन विवादित क्षेत्र पर अपना दावा जताने के प्रयास के रूप में किया गया था.

चीन ने फिर पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) में चीन ने युद्धस्तर पर ट्रैक बनाना शुरू किया और जल्द ही इसका निर्माण कर लिया गया. ये निर्माण पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे तक स्पंगगुर (लद्दाख) तक रहा. वहीं निर्माण के बाद चीन क्षेत्र में नाव और पैदल गश्त दोनों का समन्वय करने में सक्षम थे.

कारगिल युद्ध के दौरान चीन द्वारा की गई इन तीन हरकतों से इस बात की जानकारी मिलती है कि भले ही चीन ने युद्ध के दौरान तटस्थ होने की बात कही. मगर वह भारत के पाकिस्तान के साथ जारी युद्ध के बीच लद्दाख में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा हुआ था. इसके अलावा, कहीं न कहीं चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत पर बड़ी कार्रवाई करने की योजना भी बना रहा था. हालांकि, चीन ऐसा करने में सफल नहीं हो पाया.