Mutual Fund इन्वेस्टर्स को डिविडेंड और ग्रोथ ऑप्शन में क्या चुनना चाहिए? इस तरह लें फैसला

 अगर आप म्यूचुअल फंड के निवेशक हैं तो डिविडेंड ऑप्शन, ग्रोथ ऑप्शन और डिविडेंड री-इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के बारे में जरूर सुना होगा. अगर अभी तक इसके बारे में नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं, इस आर्टिकल में आपको बताएंगे कि तीनों ऑप्शन क्या होते हैं और इसके क्या फायदे हैं. सही जानकारी होने पर आप अपने लिए बेहतर विकल्प का चुनाव कर पाएंगे. इससे आपका रिटर्न बेहतर होगा.

मूल रूप से तीनों ऑप्शन रिटर्न देने का एक तरीका है. सबसे पहले जानते हैं कि ग्रोथ ऑप्शन क्या होता है. मान लीजिए कि A ने 10 रुपए के NAV प्राइस पर 1000 यूनिट पर्चेज किया है. इस तरह उसका कुल इन्वेस्टमेंट 10 हजार रुपए हो गया. मान लीजिए कि 5 साल बाद उस NAV की वैल्यु 10 रुपए से बढ़कर 40 रुपए हो गई. ऐसे में प्रति NAV फायदा 30 रुपए हुआ और 1000 यूनिट पर टोटल फायदा 30000 रुपए हुआ. इस हिसाब से A के 10 हजार के इन्वेस्टमेंट पर नेट फायदा पांच सालों में 30 हजार रुपए रहा.

अन्य फायदा नहीं मिलता है

हालांकि इन्वेस्टमेंट पीरियड के दौरान इन्वेस्टर को किसी तरह का अन्य फायदा नहीं मिलता है. इसका दूसरा उदाहरण गोल्ड इन्वेस्टमेंट, प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट है जहां आपके इन्वेस्टमेंट का जो ग्रोथ होता है, वही आपकी कमाई है. म्यूचुअल फंड के निवेशकों को एक और बात ध्यान में रखना चाहिए कि 1 साल के बाद NAV बेचने पर 10 फीसदी का LTCG यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. 1 साल के भीतर 15 फीसदी का STCG टैक्स लगता है.

डिविडेंड ऑप्शन में रेग्युलर इनकम होता है

अब दूसरा ऑप्शन है डिविडेंड ऑप्शन. इसमें आपको रेग्युलर इंटरवल पर डिविडेंड इनकम मिलता है. हालांकि यह कितना मिलता है और कितने अंतराल पर मिलता है, यह पहले से फिक्स नहीं होता है. डिविडेंड ऑप्शन में NAV का ग्रोथ कम देखा जाता है. उदाहरण के तौर पर A ने 10 रुपए के NAV पर 1000 यूनिट पर्चेज किया. उसका कुल इन्वेस्टमेंट 10 हजार रुपए हुआ. एक साल के भीतर यह NAV बढ़कर 15 रुपए का हो जाता है, लेकिन फंड हाउस ने प्रति एनएवी 2 रुपए डिविडेंड के रूप में देने का फैसला किया. ऐसे में एक साल बाद यह NAV महज 13 रुपए रह जाता है. अगर यह ग्रोथ ऑप्शन होता तो एनएवी की वैल्यु एक साल बाद 15 रुपए होती.

शॉर्ट टर्म के लिए डेट फंड ज्यादा फायदेमंद

निवेशकों के लिहाज से बात करें तो लॉन्ग टर्म के लिए डेट फंड के मुकाबले इक्विटी फंड बेहतर रिटर्न देता है. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आप कितने दिनों के लिए निवेश करते हैं और आपका ऑब्जेक्टिव क्या है साथ में टैक्स कैलकुलेशन को देखते हुए डिविडेंड ऑप्शन या ग्रोथ ऑप्शन का चयन करना चाहिए. अगर कोई शॉर्ट टर्म के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए डेट फंड ज्यादा फायदेमंद होता है.