हर महीने क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट खर्च कर देते हैं? जान लीजिए इसका बड़ा नुकसान

 क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो हर महीने क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट खर्च कर देते हैं? इससे हो सकता है कि आपका खर्च चल जाता हो, कार्ड से पूरा पैसा स्वाइप कर लेते हैं, लेकिन इसका बड़ा घाटा भी उठाना पड़ सकता है. होम लोन लेने में दिक्कत पेश आ सकती है. हो सकता है कि आपका एप्लिकेशन मंजूर होने में कुछ ज्यादा वक्त लग जाए.

इसे एक उदाहरण से समझें. मान लीजिए हेमंत हर महीने अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट को खर्च कर देते हैं. महीने का अंतिम दिन आते-आते वे कार्ड का पूरा पैसा स्वाइप कर देते हैं. इससे उनको खर्च चलाने में आसानी होगी लेकिन लोन लेने में दिक्कत आ सकती है. होम लोन लेना हो तो हेमंत को बैंक के कई चक्कर लगाने पड़ सकते हैं. इसकी वजह ये है कि क्रेडिट रिपोर्ट में क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट ज्यादा है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हेमंत हर महीने 100 परसेंट तक क्रेडिट लिमिट खर्च कर देते हैं. हेमंत को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि क्रेडिट लिमिट खर्च करने का घाटा क्या होता है.

क्या है क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट

क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट या रेश्यो वो अमाउंट होता है जो हम क्रेडिट कार्ड में इस्तेमाल करते हैं. इस अमाउंट को क्रेडिट लिमिट से डिवाइड कर देते हैं. इसे अकसर प्रतिशत में दिखाया जाता है. मान लीजिए हेमंत के पास दो क्रेडिट कार्ड जिनपर हर महीने 1,00,000 रुपये की लिमिट है. हेमंत हर महीने 95,000 रुपये खर्च कर देते हैं. इस हिसाब से क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो 95 परसेंट हुआ.

95 परसेंट रेश्यो से दिक्कत

मान लें कि हेमंत ने किसी बैंक में होम लोन के लिए अप्लाई किया है. उनकी ईएमआई 50,000 रुपये की बन रही है और उनकी हर महीने सैलरी 1.5 लाख रुपये आती है. अगर हेमंत हर महीने क्रेडिट कार्ड से 95,000 रुपये खर्च कर देते हैं तो उनके पास अन्य खर्च के लिए 55,000 रुपये बचेंगे. जिस बैंक में हेमंत होम लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उस बैंक के लिए वे क्रेडिट रिस्क में माने जाएंगे क्योंकि वे पूरी क्रेडिट लिमिट खर्च कर देते हैं. ऐसे में बैंक मान कर चलेगा कि हेमंत ईएमआई चुकाने में परेशानी का सामना कर सकते हैं.

क्या होनी चाहिए क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट

क्रेडिट एक्सपर्ट बताते हैं कि लोगों को क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट 30 परसेंट के आसपास रखनी चाहिए. क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट कम रहने का अर्थ है कि व्यक्ति अपने कार्ड का प्रबंधन सही ढंग से कर रहा है. इससे यह भी पता चलता है कि अपने फाइनेंस का प्रबंधन सही ढंग से किया जा रहा है. ऐसे व्यक्ति कर्ज के जंजाल में कम फंसते हैं और उनका क्रेडिट स्कोर भी अच्छा रहता है.

क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट कैसे सुधारें

  • इसके लिए क्रेडिट कार्ड पर खर्च को कम करना होगा. जब जरूरी हो तभी क्रेडिट कार्ड को स्वाइप करना चाहिए. जैसे फोन बिल या फ्यूल पेमेंट के लिए.
  • इसके लिए अलग-अलग क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं और अपने खर्च को बांट सकते हैं. इससे 30 परसेंट तक क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट बनाए रखने में मदद मिलेगी. यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा क्रेडिट कार्ड का मतलब ये नहीं होना चाहिए कि ज्यादा खर्च करना है
  • चाहें तो क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के लिए बैंक से कह सकते हैं. इससे क्रेडिट कार्ड यूटिलाइजेशन रेट कम रहेगी. यह भी ध्यान रखना होगा कि खर्च इतना न करें कि क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट बढ़ जाए.
  • अगर क्रेडिट कार्ड पर खर्च कम नहीं कर सकते तो महीने में दो बार उसका बिल चुकाने की कोशिश करें. इससे मंथली क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेट घट जाएगी और क्रेडिट स्कोर सुधर जाएगा.