रेलवे का अनोखा प्रोजेक्ट, अब स्टेशनों पर जमा हुए कूड़े-कचरे से होगी लाखों की कमाई

 भारतीय रेलवे इन दिनों आधुनिकता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है. इसी क्रम में रेलवे स्टेशनों पर सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और रेवेन्यू बढ़ाने के मकसद से नॉर्दन रेलवे के दिल्ली डिविजन ने नए वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के पर काम शुरू कर दिया है. ठोस कूड़े के निस्तारण की समस्या को दूर करने के लिए प्रोजेक्ट को लॉन्च किया गया है. इन अनोखे प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली डिविजन ने एक एजेंसी के साथ करार किया है. इसके सहयोग से दिल्ली डिवीजन के तहत आने वाले 30 प्रमुख रेलवे स्टेशनों से कूड़ा इकट्ठा किया जाएगा.

इस प्रोजेक्ट में ज्यादातर दिल्ली एनसीआर के ही रेलवे स्टेशन शामिल हैं. इसके बदले में सालाना दिल्ली डिवीजन को 10 लाख रुपये मिलेंगे. कोरोना महामारी को देखते हुए देखते हुए रेलवे द्वारा शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को काफी अहम माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट से रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई की व्यवस्था को और बेहतरीन तरीके से सुधारा जा सकेगा.

कूड़े को अलग-अलग करके होगी प्रोसेसिंग?

इस प्रोजेक्ट के लिए लाहौरी गेट पर रेलवे द्वारा मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी स्थापित की गई है. यह प्लांट 30 रेलवे स्टेशनों पर जेनरेट होने वाले कूड़े को सही तरीके से निस्तारण में अहम भूमिका निभाएगा. यहां गीले, सूखे ठोस और नरम कूड़े को अलग-अलग करके उसे प्रोसेस किया जाएगा.

बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल्स से बनेगा कंपोस्ट

यहा कूड़े को कई तरह की अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाएगा. फिर री-साइकिल के लायक कूड़े को प्रोसेसिंग के लिए अगले चरण में भेजा जाएगा. जैसे कि बचे हुए खाने और अन्य बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल्स को कंपोस्ट बनाने के लिए भेजा जाएगा. वहीं, सूखे कूड़े के निस्तारण के लिए एक अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी.

अधिकारियों ने बताया कि प्लास्टिक के कूड़े को सीपीसीबी द्वारा बताई गई सात अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर अलग किया गया है. री-साइकिल करने के लिए उसे पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा अधिकृत किए गए वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में भेजा जाएगा.

30 रेलवे स्टेशनों पर शुरू हो चुका है काम

इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए दिल्ली डिवीजन ने कूड़ा प्रबंधन में क्षेत्र में काम करने वाली एक एजेंसी के साथ करार किया है. इस प्रोजेक्ट पर अप्रैल के आखिरी हफ्ते में काम शुरू किया गया था और अभी तक 30 रेलवे स्टेशनों पर जेनरेट हुए 15000 किलो से ज्यादा कूड़े को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और री-साइकलिंग प्लांट में भेजा जा चुका है.

दिल्ली डिवीजन के डीआरएम मुताबिक यह प्रोजेक्ट इसकी मिसाल है कि किस तरह एक खर्चीली काम को किराए से इतर रेवेन्यू जनरेट करने वाले काम के रूप में तब्दील कर दिया गया है.