बिना किसी डॉक्‍युमेंट के ही तुरंत मिलेगा 1 लाख, जानिए क्‍या है नियम और कैसे निकाल सकते हैं EPF एडवांस

 नौकरीपेशा लोग कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के जरिए भविष्‍य निधि में निवेश करते हैं. यह रकम नियोक्‍ता के जरिए हर महीने कर्मचारियों की सैलरी से कटकर उनके प्रोविडेंट फंड अकाउंट में जमा हो जाती है. आमतौर पर प्रोविडेंट फंड में यह निवेश रिटायरमेंट के लिए किया जाता है. लेकिन, कोविड-19 संकट को देखते हुए EPFO ने सब्‍सक्राइबर्स को कहा है कि इस फंड का कुछ हिस्‍सा रिटायरमेंट से पहले भी एडवांस के तौर पर निकाल सकते हैं.

इस संबंध में EPFO ने ऑफिस मेमोरेंडम भी जारी किया था. इसी मेमोरेंडम में जानकारी थी कि बिना किसी डॉक्‍युमेंट के कैसे अपने पीएफ अकाउंट से 1 लाख रुपये तक निकाले जा सकते हैं. कोरोना संक्रमण समेत किसी अन्‍य तरह के मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में मेडिकल एडवांस प्राप्‍त किया जा सकता है.

ईपीएफओ ने कहा, ‘जानलेवा बीमारियों की स्थिति में कई बार मरीज को तुरंत अस्‍पताल भर्ती कराना अनिवार्य हो जाता है ताकि उनकी जान बचाई जा सके. इस तरह के नाजुक हालत वाले मरीजों की बीमारी पर होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए एडवांस की सुविधा दी जा रही है.’

मेडिकल एडवांस के लिए डालना होगा रिक्‍वेस्‍ट

इसमें यह भी कहा कि कुछ मामलों में मरीजों की स्थिति बेहद नाजुक होती है, पहले से पता नहीं होता कि इलाज पर कितना खर्च होने वाला है. ऐसी स्थिति में मेडिकल एडवांस की सुविधा काफी मददगार साबित हो सकती है. इसके लिए कर्मचारी या उनके परिवार के सदस्‍यों को मेडिकल एडवांस प्राप्‍त करने के लिए एक रिक्‍वेस्‍ट लेटर सबमिट करना होता है. इस लेटर में मरीज के अस्‍पताल व उनकी बीमारी के बारे में भी जानकारी देनी होती है.

जल्‍द से जल्‍द जारी हो जाती है एडवांस की रकम

ऐसी स्थिति में औपचारिकताओं में ढील देते हुए अथॉरिटी द्वारा 1 लाख रुपये का मेडिकल एडवांस जारी किया जा सकता है. आवेदन के बाद इस रकम को जल्‍द से जल्‍द जारी किया जाएगा. अगर यह आवेदन किसी वर्किंग डे पर किया गया है तो उसी दिन या फिर इसके अगले दिन ही जारी कर दिया जाएगा.

मेडिलक एडवांस की यह रकम कर्मचारी की सैलरी अकाउंट में या सीधे संबंधित अस्‍पताल को ट्रांसफर किया जा सकता है. इसका फैसला कर्मचारी के परिवार पर निर्भर करेगा.

डिस्‍चार्ज होने के 45 दिन के अंदर सबमिट करना होगा मेडिकल बिल

अस्‍पताल से डिस्‍चार्ज होने के 45 दिन के अंदर कर्मचारी को मेडिकल बिल सबमिट करना होगा. नियमों के तहत फाइनल बिल में एडवांस की रकम को अडजस्‍ट कर दिया जाता है. इसके बाद मेडिकल बिल का रिइम्‍बर्समेंट या एडवांस की रिकवरी का फैसला इसके बाद ही लिया जाता है.