भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली गेंद फेंकी और 5 विकेट लिए, लेकिन पाकिस्तान के भी पहले क्रिकेटर बने!

 नई दिल्ली. भारत ने 1932 में अपना पहला टेस्ट इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स (IND vs ENG Debut Test) में खेला था. हालांकि, भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और सिर्फ 3 दिन में ही इंग्लिश टीम ने उसे 158 रन से हरा दिया. इसके बावजूद ऊंची कद-काठी के एक गेंदबाज ने रफ्तार की वजह से सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा था. इस गेंदबाज का नाम था मोहम्मद निसार (Mohammad Nisar Birthday). उन्होंने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में न सिर्फ पहली गेंद फेंकी, बल्कि पारी में 5 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज भी बने. आज यानी 1 अगस्त को उनका जन्मदिन है. मोहम्मद निसार 1 अगस्त, 1910 को पंजाब के होशियारपुर में जन्मे थे. उन्होंने 22 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू किया.


निसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार आगाज के बाद भी देश के लिए सिर्फ 6 ही टेस्ट खेल पाए. लेकिन इतने छोटे से करियर में उन्होंने अपनी तेज रफ्तार गेंदबाजी से बड़े-बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया. इसका नमूना उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में हुए अपने पहले टेस्ट में दिखा दिया था. उस मैच में इंग्लैंड के कप्तान डगलस जार्डिन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया.

25 हजार से ज्यादा दर्शक स्टेडियम में उस मैच को देखने के लिए मौजूद थे. इंग्लैंड की तरफ से हर्बर्ट सटक्लिफ और पर्सी होम्स पारी की शुरुआत करने आए. इस मैच से 10 दिन पहले ही इस जोड़ी ने यॉर्कशर की तरफ से खेलते हुए पहले विकेट के लिए 555 रन जोड़े थे. लेकिन निसार की रफ्तार के आगे यह दोनों फेल हो गए.


बच्चे निसार के गेंदबाजी एक्शन को कॉपी करते थे
निसार ने सटक्लिफ को 3 और होम्स को 6 रन पर क्लीन बोल्ड किया. इस झटके से इंग्लिश टीम उबर ही नहीं पाई और पहली पारी में 259 रन पर ऑल आउट हो गई. निसार ने 93 रन देकर पांच विकेट लिए और रातों-रात स्टार बन गए और लॉर्ड्स के बाहर बच्चे निसार की गेंदबाजी एक्शन की कॉपी करने लगे थे.


नौकरी जाने के डर से बीच सीरीज से भारत लौटे
इसके बाद भारत को 1933-34 में अपने घर पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट खेलने का दूसरा मौका मिला. मुंबई में खेले गए उस टेस्ट में निसार ने गेंदबाजी की शुरुआत की और फिर पांच विकेट झटकने का कारनामा किया. इस दौरे पर इंग्लिश टीम अजेय रही थी. सिर्फ एक बार उसे बनारस में विजयनगरम महाराज की टीम से हार का सामना करना पड़ा. उस मुकाबले में निसार ने 117 रन देकर 9 विकेट लिए थे.


1936 में, भारत ने आखिरी बार इंग्लैंड का दौरा किया, इससे पहले कि दूसरे विश्व युद्ध ने टेस्ट क्रिकेट पर 10 साल के लिए रोक लगा दी. निसार ने उस सीरीज के तीसरे टेस्ट में 5 विकेट लिए. लेकिन उन्हें रेलवे ने वापस भारत बुला लिया. निसार उस समय भारतीय रेल में काम करते थे. हालांकि, निसार बीच सीरीज में ही देश लौटना नहीं चाहते थे. लेकिन नौकरी जाने के डर से उन्हें भारत लौटना पड़ा. उन्हें नौकरी के कारण कई बार रणजी ट्रॉफी के मैच भी छोड़ने पड़ जाते थे.

भारत के लिए सिर्फ 4 साल टेस्ट क्रिकेट खेला
26 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. उनके पास एक खास रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने डेब्यू और आखिरी दोनों टेस्ट में पांच विकेट लिए थे. दूसरे विश्व युद्ध के कारण इस तेज गेंदबाज की उपलब्धियों को भुला दिया गया. उन्होंने 6 टेस्ट में 28 से ज्यादा के औसत से 26 विकेट हासिल किए थे. वहीं, 93 फर्स्ट क्लास मैच में उन्होंने 396 विकेट लिए थे. इस दौरान उन्होंने 32 बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया.


बंटवारे के बाद पाकिस्तान गए निसार
निसार 1947 में देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए थे. वो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के संस्थापकों में से एक रहे. उन्हें आज भी लोग पाकिस्तान के पहले क्रिकेट खिलाड़ी मानते हैं. पाकिस्तान जाने के बाद भी वो अक्सर लाहौर से भारत के अपने साथी खिलाड़ियों को चिठ्ठियां लिखा करते थे. हालांकि, वो दोबारा कभी अपने जन्मस्थान होशियारपुर नहीं जा पाए. वो पाकिस्तानी रेलवे में बतौर अधिकारी लंबे समय तक काम करते रहे. वह अपने किट बैग को अपने साथ रखते थे और जहां ट्रेन एक रात के लिए रूकती थी, वहां लोकल टीम के साथ क्रिकेट मैच खेलने के लिए उतर जाते थे. 1963 में ऐसी ही एक यात्रा के दौरान ट्रेन में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था. मौत के समय भी क्रिकेट किट उनके पास ही थी.


भारत-पाकिस्तान ने शुरू की निसार ट्रॉफी
निसार का कद क्रिकेट में कितना बड़ा था. इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता था कि उनके नाम पर भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड ने 2006 में मोहम्मद निसार ट्रॉफी शुरू की. इस टूर्नामेंट में दोनों देशों की घरेलू क्रिकेट की चैम्पियन टीमें एक-दूसरे का मुकाबला करती थीं. उत्तर प्रदेश और मुंबई ने पहले दो साल इस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था. वहीं, सियालकोट ने 2008 में आखिरी बार यह ट्रॉफी जीती थी. तब विराट कोहली, जो आज टीम इंडिया के कप्तान हैं, वो मैन ऑफ द मैच चुने गए थे. हालांकि, बाद में दोनों देशों के खराब होते रिश्तों का असर इस टूर्नामेंट पर भी पड़ा और यह बंद हो गया.