एशेज सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम चुनेगा ये पूर्व कप्तान, नए चीफ सेलेक्टर के तौर पर संभाली कमान

 एशेज सीरीज 8 दिसंबर से शुरू होना है. लेकिन उससे 4 महीने पहले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ये बदलाव नए चीफ सेलेक्टर के तौर पर हुआ है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का चीफ सेलेक्टर अब बदल चुका है. ऑस्ट्रेलियाई मेंस टीम पर मुहर लगाने की जिम्मेदारी अब ट्रेवर हॉर्न्स (Trevor Horns) पर न होकर जॉर्ज बेली (George Bailey) पर होगी, जिन्होंने उनकी जगह कुर्सी संभाली है. जॉर्ज बेली ने अपनी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को ढेर सारी कामयाबी दिलाई है. उन्होंने भारत के खिलाफ सीरीज से अपनी कप्तानी का डेब्यू किया था. वो ऑस्ट्रेलिया के लिए ICC टूर्नामेंट में 100 फीसद जीत का रिकॉर्ड रखने वाले कप्तान हैं. लेकिन अब उनके सामने चुनौती इन कामयाबियों से परे हैं. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और नए चीफ सेलेक्टर के सामने चैलेंज एक ऐसी टीम चुनने की होगी, जो एशेज की जंग में इंग्लैंड को शिकस्त दे सके.

ट्रेवर हॉर्न्स जो कि अगले साल जनवरी में 68 साल के हो जाएंगे, उन्होंने चीफ सेलेक्टर के अपने दूसरे कार्यकाल के बाद रिटायर होने का फैसला किया है. ट्रेवर का पहला कार्यकाल साल 1995 से साल 2005 तक का रहा था. जबकि उनका दूसरा कार्यकाल 2016 के बाद का है.

नए चीफ सेलेक्टर बने बेली ने ट्रेवर का किया शुक्रिया

125 इंटरनेशनल मैचों का अनुभव रखने वाले जॉर्ज बेली ने नया चीफ सेलेक्टर बनने के बाद कहा, ” सबसे पहले मैं ट्रेवर का उनके अविश्वसनीय योगदान के लिए शुक्रिया अदा करना चाहता हूं . उन्होंने लंबे समय तक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की सेवा की है. जब वो चीफ सेलेक्टर थे तब मैं भी ऑस्ट्रेलियाई टीम का खिलाड़ी और कप्तान रहा. चुनौती चाहे जैसी भी हो, ट्रेवर ने हमेशा उसका ठंडे दिमाग से सामना किया. जिस तरह से उन्होंने एक खिलाड़ी से एक सेलेक्टर की भूमिका में खुद को ढाला. मैं चाहूंगा कि मैं भी वही अंदाज अपना सकूं और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नए रोल के साथ अपना योगदान दे सकूं.”

ट्रेवर की उपलब्धियों को आगे बढ़ाना बेली के लिए चुनौती

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व लेग स्पिनर रहे ट्रेवर हॉर्न्स 1989 में एशेज सीरीज जीतने वाली टीम का हिस्सा थे. चीफ सेलेक्टर के उनके पहले कार्यकाल में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने लगातार 5 एशेज जीते जबकि बैक टू बैक वर्ल्ड कप खिताब पर कब्जा किया. उनका दूसरा कार्यकाल भी कमाल रहा जिसमें 2001 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड में खेलकर एशेज का खिताब बचाने में कामयाब रही.

साफ है जॉर्ज बेली के सामने ट्रेवर हॉर्न्स की विरासत को आगे ले जाने की चुनौती वाकई में बड़ी है, जिसकी शुरुआत उन्हें बड़े लेवल पर एशेज सीरीज के लिए टीम चुनकर करनी होगी.