“मानसिक तौर पर सबसे मजबूत खिलाड़ी हैं धोनी”, उनकी तरह दबाव को झेलना हर किसी के बस की बात नहीं

 इंग्लैंड के ऑलराउंडर बेन स्टोक्स (Ben Stokes) के क्रिकेट से ब्रेक लेने के फैसले के बाद खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बातें हो रही हैं.  ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देकर क्रिकेट से ब्रेक ले लिया है. वो भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज नहीं खेलेंगे. इस बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनिंदर सिंह ने क्रिकेटरों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की है. 56 वर्षीय क्रिकेटर को टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) याद आए. उन्होंने कहा कि धोनी के दबाव से निपटने के तरीके को फॉलो करना सभी के लिए आसान नहीं है.

एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में मनिंदर सिंह से पूछा गया कि क्या एमएस धोनी की तरह एक बार क्रिकेट के मैदान से बाहर जाने के बाद इस खेल और मीडिया के दवाब से पूरी तरह से छुटकारा पाया जा सकता है. भारत के लिए 35 टेस्ट खेल चुके मनिंदर ने बताया कि एमएस धोनी हमेशा मीडिया और अन्य चीजों से दूर रहे हैं. उनका यह वास्तिवक स्वभाव रहा है.

हर कोई धोनी नहीं हो सकता

उन्होंने कहा- “देखिए हर कोई एमएस धोनी नहीं हो सकता क्योंकि हर किसी का एक बुनियादी स्वभाव होता है जो दूसरों से अलग होता है. धोनी अपने शुरुआती दिनों से ही हमेशा से ऐसे ही रहे हैं. उन्होंने हमेशा कहा कि उन्होंने अखबार नहीं पढ़ा औैर ना ही न्यूज को फॉलो किया. जो ध्यान भटकाने वाली चीजों से खुद को संभालने का एक शानदार तरीका है, लेकिन दूसरों के लिए इसे फॉलो करना आसान नहीं है.”

मनिंदर सिंह ने कहा- “जब कोई अपने मूल स्वभाव को बदलने की कोशिश करता है, तो यह आपके दिमाग के अंदर भी बहुत दबाव डालता है. इसलिए दबाव से निपटने के लिए धोनी के तरीके का पालन करना आसान नहीं है.”

भारतीय क्रिकेटरों में भी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या

BCCI के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने हाल ही में कहा था कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे भारतीय क्रिकेटरों को प्रभावित नहीं करते हैं. इस पर जब मनिंदर सिंह से उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने कहा कि कई लोग इनकार की मुद्रा में हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें यकीन है कि कई क्रिकेटर पहले से ही अपनी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए मदद मांग रहे हैं.

बहुत से लोग हैं इनकार के मोड में

उन्होंने कहा- “यह केवल क्रिकेटर ही नहीं है, बल्कि बहुत से लोग इनकार मोड में हैं. आप कह सकते हैं कि मैंने इस विषय की शुरुआत भारत में की थी, लेकिन विराट कोहली ने भी अपने संघर्ष के बारे में बात की थी. इसलिए भारत में भी मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे हैं. जब कोई डाउन होता है तो वह अपने संघर्ष के बारे में बात कर रहा होता है. भारत में लोग यह कहने की जल्दी में हैं कि वह पागल हो गया. लेकिन, मुझे यकीन है कि बहुत सारे क्रिकेटर किसी न किसी से (मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से निपटने के लिए) मदद मांग रहे हैं और ले रहे हैं.”