भारतीय बल्लेबाज ने ठोके 366 रन, टीम ने बनाया 6 विकेट पर 944 का स्कोर, बना हैरतअंगेज रिकॉर्ड

 एक भारतीय बल्लेबाज जिसने 366 रन की पारी खेली और उसकी टीम ने इसके चलते छह विकेट पर 944 रन का विशालकाय स्कोर खड़ा किया. लेकिन वह कभी टीम इंडिया में नहीं आ सका. यह बात केवल एक मैच की एक पारी के आधार पर नहीं कही जा रही. बल्कि उस बल्लेबाज ने अपने करियर में 21 फर्स्ट क्लास शतक लगाए और साढ़े हजार से ज्यादा रन बनाए. ऐसे में लगातार रन बनाने के बाद भी वह कभी भारत के लिए नहीं खेल सका. उसकी गिनती देश के सबसे काबिल खिलाड़ियों में होती है. यहां बात हो रही है मातुरी वेंकट श्रीधर की. जिन्हें सब लोग एमवी श्रीधर (MV Sridhar) के नाम से जानते हैं. आज उनका बर्थडे है.

श्रीधर दाएं हाथ के बल्लेबाज थे. उन्होंने 1988-89 के सीजन से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा और 1999-2000 तक खेले. इस दौरान हैदराबाद के लिए 97 फर्स्ट क्लास मैचों में 48.91 की औसत के साथ 6701 रन बनाए. उन्होंने 21 शतक और 27 अर्धशतक लगाए. श्रीधर ने 35 लिस्ट ए मैच भी खेले और 29.06 की औसत से 930 रन बनाए. इस फॉर्मेट में उनके नाम कोई शतक नहीं है लेकिन पांच फिफ्टी उन्होंने लगाई है. वे हैदराबाद के उन बल्लेबाजों में से हैं जिन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तिहरा शतक लगाया. उनके अलावा वीवीएस लक्ष्मण और अब्दुल अजीम ही यह कमाल कर सके हैं. श्रीधर ने 1994 में आंध्र के खिलाफ 366 रन की पारी खेली थी. यह आज भी रणजी ट्रॉफी इतिहास का तीसरा सर्वोच्च स्कोर है. उनसे आगे केवल भाउसाहब निम्बालकर के 443 नाबाद और संजय मांजरेकर के 377 रन ही हैं.

श्रीधर के क्रीज पर रहने के दौरान बने 850 रन

अपनी 366 रन की पारी के दौरान श्रीधर ने एक गजब का रिकॉर्ड बनाया. जब टीम का स्कोर 30 रन पर एक विकेट था तब वे क्रीज पर उतरे. फिर जब वे आउट हुए तब हैदराबाद का स्कोर पांच विकेट पर 880 रन था. यानी श्रीधर के विकेट पर रहने के दौरान हैदराबाद ने 850 रन बनाए. यह एक बल्लेबाज के क्रीज पर रहने के दौरान किसी टीम की ओर से बनाए गए सर्वाधिक रन हैं. इस मैच में हैदराबाद ने छह विकेट पर 944 रन बनाए थे. यह किसी भी भारतीय टीम की ओर से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर है. इस मुकाबले में श्रीधर के अलावा नोएल डेविड और विवेक जयसिम्हा ने दोहरे शतक लगाए थे.

श्रीधर को अपने करियर के दौरान कभी भारतीय टीम में शामिल होने का मौका नहीं मिला. वे एक क्वालिफाइड डॉक्टर भी थे. क्रिकेट से संन्यास के बाद श्रीधर कई भूमिकाओं में रहे. वे हैदराबाद क्रिकेट के सचिव पद पर भी रहे. साथ ही 2008 के भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम इंडिया के मैनेजर भी थे. मंकीगेट विवाद को सुलझाने और हरभजन सिंह को सजा से बचाने में उनका अहम योगदान था. 2017 में एमवी श्रीधर का देहांत हो गया था.