भारतीय ओपनर के टीम इंडिया में चयन पर मचा बवाल, कप्‍तान और बीसीसीआई में ठनी!

 भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाडि़यों के चयन को लेकर विवाद होना कोई नई बात नहीं है. पहले भी ऐसे वाकये सामने आते रहे हैं. लेकिन जिस घटना की हम बात कर रहे हैं वो इसलिए अपने आप में अनूठी थी क्‍योंकि टीम इंडिया के लिए हुए इस चयन को लेकर कप्‍तान से लेकर बीसीसीआई तक बंटी हुई थी. टीम में चयन के लिए कई खिलाडि़यों का नाम सामने आ रहा था लेकिन मुहर दो क्रिकेटरों के नाम पर लगी. इनमें से एक खिलाड़ी वो है जिसने विवादों के बीच भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के लिए डेब्‍यू किया और फिर यही उसका इकलौता मुकाबला भी साबित हुआ. ये खिलाड़ी बाद में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पहुंचा. और इस खिलाड़ी का आज ही के दिन यानी 3 अगस्‍त को जन्‍मदिन होता है.

दरअसल, 3 अगस्‍त 1938 को अपूर्व कुमार सेनगुप्‍ता (Apoorva Kumar Sengupta) का जन्‍म लखनऊ में हुआ. साल 1959 में वो लम्‍हा आया जब उन्‍होंने टीम इंडिया (Team India) के लिए डेब्‍यू किया. तब वेस्‍टइंडीज के खिलाफ मद्रास टेस्‍ट से कुछ दिन पहले ही गुलाम अहमद ने संन्‍यास ले लिया था. चोटिल होने के चलते विजय मांजरेकर इस मैच का हिस्‍सा नहीं थे. ऐसी स्थिति में जसु पटेल, एजी कृपाल सिंह, मनोहर हार्दिकर और अपूर्व सेनगुप्‍ता चयन की रेस में शामिल हो गए. कप्‍तान पॉली उमरीगर मनोहर को चुने जाने के पक्ष में थे जबकि बीसीसीआई जसु पटेल का समर्थन कर रही थी. मैच से पहले वाली रात को उमरीगर ने कप्‍तानी से इस्‍तीफा दे दिया. आखिर में अपूर्व सेनगुप्‍ता और कृपाल सिंह को खेलने का मौका दिया गया.

टीम इंडिया के लिए इकलौते टेस्‍ट में मिली विफलता

हालांकि अपने डेब्‍यू मैच में अपूर्व सेनगुप्‍ता का प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा और पहली पारी में उन्‍हें वेस हॉल ने 1 रन पर पवेलियन भेजा तो दूसरी पारी में भारतीय ओपनर को रॉय गिलक्रिस्‍ट ने 8 रनों पर आउट किया. अपूर्व सेनगुप्‍ता के करियर का यही पहला और आखिरी टेस्‍ट मैच साबित हुआ. इसके बाद उन्‍होंने भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं और लेफ्टिनेंट जनरल, थ्री स्‍टार की रैंक हासिल की. अपूर्व ने भारतीय टीम के लिए खेले एक टेस्‍ट में 9 रन बनाए. हालांकि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्‍होंने 45 मुकाबले खेले. इनमें 68 पारियों में चार बार नाबाद रहते हुए 26.48 की औसत से 1695 रन बनाए. दो शतक और आठ अर्धशतकों के प्रथम श्रेणी करियर में उनका उच्‍चतम स्‍कोर नाबाद 146 रन का रहा. वहीं प्रथम श्रेणी मैचों में उन्‍होंने गेंदबाजी में भी हाथ आजमाया और विरोधी टीम के 21 बल्‍लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई. पारी में 32 रन देकर छह विकेट लेने का सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन भी किया.