Tokyo Olympics में जिसने बढ़ाया भारत का मान, उसके घरवालों को धमका रहे पड़ोसी, घर की मरम्मत कराने से रोका

 अपने पहले ओलिंपिक से लौटे भारतीय तीरंदाज प्रवीण जाधव (Pravin Jadhav) के परिजनों को ईर्ष्यालु पड़ोसी धमकी दे रहे हैं कि वे अपने टिन के घर की मरम्मत नहीं कराए. जाधव टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympics) में रैंकिंग दौर में अपने सीनियर साथियों अतनु दास और तरुणदीप राय से आगे रहे थे. इसके बाद मिश्रित युगल में दीपिका कुमारी के साथ उन्हें उतारा गया लेकिन वे अंतिम आठ से बाहर हो गए. वहीं एकल मुकाबलों में प्रवीण जाधव दुनिया के नंबर एक तीरंदाज ब्रेडी एलिसन से दूसरे राउंड में हार गए थे. लेकिन महाराष्ट्र के सातारा जिले में उनके साराडे गांव में उनकी शोहरत से जलने वाले पड़ोसी उन्हें धमकी भरे फोन कर रहे हैं. जाधव ने पीटीआई से कहा, ‘सुबह एक परिवार के पांच छह लोग आकर मेरे माता-पिता, चाचा-चाची को धमकाने लगे. हम अपने घर की मरम्मत कराना चाहते हैं.’

जाधव के परिवार के चार सदस्य झोपड़ी में रहते थे लेकिन उनके सेना में भर्ती होने के बाद पक्का घर बनवा लिया. जाधव ने कहा, ‘पहले भी वे परेशान करते थे और एक अलग लेन चाहते थे जिस पर हम राजी हो गए लेकिन अब वे सारी सीमा पार कर रहे हैं. हमें घर की मरम्मत कराने से कैसे रोक सकते हैं. वे हमसे जलते हैं. हम इस मकान में बरसों से रह रहे हैं और हमारे पास सारे कागजात हैं.’ भारतीय तीरंदाजी दल लौटने के बाद सीधे हरियाणा के सोनीपत चला गया जहां अगले महीने होने वाली विश्व चैम्पियनशिप के लिए अभ्यास शिविर लगा है. बुधवार को नए सिरे से ट्रायल होंगे.

जाधव ने सेना के अधिकारियों से मांगी मदद

जाधव ने कहा, ‘मेरा परिवार परेशान है और मैं भी वहां नहीं हूं. मैंने सेना के अधिकारियों को बता दिया है और वे इसे देख रहे हैं.’ सातारा जिले के एसपी अजय कुमार बंसल ने जाधव परिवार की पूरी मदद का वादा किया है. बंसल ने पीटीआई से कहा, हमें लिखित में कोई शिकायत नहीं मिली है. जमीन का विवाद है. आर्मी कर्नल का फोन आने के बाद मैं अपने लोकल इंचार्ज को जांच के लिए भेज रहा हूं. निश्चित रूप से उसे पूरी कानूनी मदद मिलेगी.

काफी संघर्ष करते हुए आगे बढ़े हैं प्रवीण

प्रवीण जाधव के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं. ऐसे में ओलिंपिक में तीरंदाजी में भारत की ओर से खेलने का उनका सफर काफी प्रभावशाली है. शुरुआती दिनों में तो प्रवीण भी पिता की तरह दिहाड़ी मजदूर ही बनने वाले थे. लेकिन फिर हालात बदले. घर की खस्ता हालत के चलते उनके पिता ने सातवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने और अपने साथ कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने के लिए बोल दिया था. लेकिन सरकारी स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर के कहने प्रवीण बेहतर जीवन की तलाश में एथलेटिक्स में चले गए. अहमदनगर के क्रीड़ा प्रबोधिनी हॉस्टल में रहने के दौरान वे आर्चरी करने लगे. फिर पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट ने उन्हें चुन लिया. इसके बाद प्रवीण ने मुड़कर नहीं देखा.