पहले ही मैच में लिए नौ विकेट, भारत को जिताया वर्ल्ड कप, दो साल में ही खत्म हो गया इंटरनेशनल करियर

 टीम इंडिया के एक वर्ल्ड कप विजेता खिलाड़ी का आज बर्थडे है. इस खिलाड़ी ने फाइनल में भारत विरोधी टीम के बड़े बल्लेबाज को सस्ते में निपटाया था और जीत की राह तैयार की थी. हालांकि यह खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट में केवल दो साल ही खेल सका. लेकिन छोटे से करियर में उसने कमाल का प्रदर्शन किया और भारतीय क्रिकेट पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी. इस खिलाड़ी का नाम है बलविंदर संधू (Balwinder Sandhu). आज उनका बर्थडे है. संधू 1982 में भारतीय टीम में आए थे और 1984 तक खेले थे. इस दौरान 1983 के वर्ल्ड कप की भारतीय टीम में भी वे रहे. फाइनल मैच में उन्होंने वेस्ट इंडीज के गॉर्डन ग्रीनिज को बोल्ड किया था. जिस गेंद पर उन्होंने यह विकेट लिया था वह काफी स्विंग हुई थी और तेजी से अंदर आई थी. इस विकेट के बाद तो भारत के गेंदबाजों ने कहर बरपा दिया था.

बलविंदर संधू दाएं हाथ के मीडियम पेसर गेंदबाज रहे. साथ ही वे निचले ऑर्डर में उपयोगी बल्लेबाजी करते थे. वे घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए खेला करते थे. यशवंत सिद्धाये, रमाकांत आचरेकर और हेमू दलवी जैसे दिग्गजों की सोहबत में रहते हुए संधू ने अपनी क्रिकेटिंग स्किल्स को मांजा. 1980-81 में करसन घावरी जब टीम इंडिया के साथ दौरे पर गए हुए थे तब संधू को मुंबई टीम में जगह मिली. गुजरात के खिलाफ उन्होंने डेब्यू किया और पहले ही मैच में कुल नौ विकेट लिए. फिर इस सीजन के फाइनल में उन्होंने दोबारा नौ विकेट लिए. इस सीजन में उन्होंने 18.72 की औसत से 25 विकेट लिए. 1982-83 के सीजन में दलीप ट्रॉफी में साउथ जोन के खिलाफ आठ विकेट लेने के अलावा उन्होंने 11वें नंबर पर बैटिंग करते हुए 56 रन की पारी खेली. इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट के लिए उन्हें टीम इंडिया से बुलावा आया.

टेस्ट में बॉलिंग से ज्यादा बैटिंग में खेलीं यादगार पारियां

पहले टेस्ट में उन्होंने जल्दी-जल्दी दो विकेट लिए मगर फिर मुदस्सर नज़र और जावेद मियांदाद ने भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं. दोनों ने 451 रन की पार्टनरशिप की. हालांकि संधू ने नौवें नंबर पर खेलते हुए भारत के लिए सबसे ज्यादा 71 रन बनाए. टेस्ट क्रिकेट में बॉलिंग से वे कुछ खास नहीं कर पाए लेकिन बैटिंग से उन्होंने अच्छा योगदान दिया. फिर आया 1983 का वर्ल्ड कप. इंग्लैंड की स्विंग की मददगार कंडीशन में उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की. साथ ही फाइनल में सैयद किरमानी के साथ मिलकर आखिरी विकेट के लिए 22 रन जोड़े. आखिर में यह रन काफी काम आए.

वर्ल्ड कप के बाद वे ज्यादा समय तक टीम इंडिया के साथ नहीं रह पाए. नवंबर 1983 में वे आखिरी बार टेस्ट और अक्टूबर 1984 में आखिरी वनडे खेला. उन्होंने आठ टेस्ट में 10 और 22 वनडे में 16 विकेट लिए. टेस्ट में उनका बैटिंग औसत 30.57 का था. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में संधू ने 55 मैच में 168 विकेट लिए.