उम्मीदों की मंजिल टूट गयी, आँखों से अश्को की धारा बह गयी, अरे तुम्हरी भी क्या इज्ज़त रह गयी, जब क्लास में लड़की भैया कह गयी।

 

करोना वायरस लॉकडाउन के रुझान आने शुरू हो गए हैं - देखकर हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे

7 दिन से घर पर बैठा हूँ।

घरवाली आते-जाते कई बार बोल चुकी है कि..

पता नहीं यह बीमारी कब जाएगी “

समझ नहीं आता कि मुझे बोल रही है कि कोरोना को “

असली दुःख जिन लड़को की शादी का मुहूर्त इस महीने था,

और लॉक डाउन के रहते उनको शादी स्थगित करनी पड़ गई।

​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​पेशेन्ट : डॉक्टर साहब बैठने में काफी परेशानी हो रही है “

डॉक्टर : कर्फ्यू देखने गए थे.. क्या ?

पेशेन्ट : हाँ.. आपको कैसे पता ?

डॉक्टर : आज कल.. वही पेशेन्ट ज्यादा आ रहे है “

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