हम को यारों ने याद भी न रखा जौन यारों के यार थे हम भी

सादगी थी तुममे, इसलिए पसंद थी तुम, वरना खूबसूरत तो तुम्हारी सहेलियां भी थी !

लोग तो अपना बना कर छोड़ देते हैं,

कितनी आसानी से गैरों से रिश्ता जोड़ लेते हैं,

हम एक फूल तक ना तोड़ सके कभी,

कुछ लोग बेरहमी से दिल तोड़ देते हैं।

जब्त कहता है खामोशी से बसर हो जाये,

दर्द की ज़िद है कि दुनिया को खबर हो जाये।

मेरी जिंदगी की कहानी भी बड़ी मशहूर हुई,

जब मैं भी किसी के ग़म में चूर हुई,

मुझे इस दर्द के साथ जीना पड़ा,

कुछ इस कदर मैं वक़्त के हाथों मजबूर हुई।

मैंने जिसे भी चाहा अपना बनाना,

सबसे पहले वही चीज मुझसे दूर हुई,

एक बार जो गए फिर कहाँ मिले वो लोग,

जिनके बिना मेरी जिंदगी बेनूर हुई।

जो दो लफ्जों की हिफाजत न कर पाए,

उनके हाथों में जिंदगी की किताब क्या देता।टूटे हुए काँच की तरह

चकना-चूर हो गया हूँ

किसी को चुभ न जाऊँ

इसलिए सबसे दूर हो गया हूँ।

दर्द में जीने की हमें आदत कुछ ऐसी पड़ी,

कि अब दर्द ही अपना हमदर्द लगने लगा।

मसला ये नहीं है कि

दर्द कितना है,

मुद्दा ये है कि परवाह

किसको है।

दिल से रोये मगर होठों से मुस्कुरा बैठे,

यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे,

वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का ,

और हम उनके लिए ज़िन्दगी लुटा बैठे।।

दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते,

गम के आँसू न बहाते तो और क्या करते,

उसने माँगी थी हमसे रौशनी की दुआ,

हम अपना घर न जलाते तो और क्या करते।

Comments are closed.