मेरा कत्ल करने की उनकी साजिश तो देखो पास से गुज़रे तो मास्क हटा के छींक दिये

मांग भरने की सजा.. कुछ इस तरह से पा रहा हूं - लाजवाब जोक्स

लंपट डॉक्टर से : डॉक्टर साहब.. दवाई कैसे लेनी है ?

डॉक्टर : अरे.. पैसे देकर लेनी है भाई ?

लंपट वहीं बेहोश हो गया।

निशा ( गुस्से में ) : मैं.. घर छोड़ कर जा रही हूं ”

उमेश : हां.. जान ” छोड़ो अब ”

निशा : आपकी.. बस यही जान कहने की आदत,

मुझे हमेशा रोक लेती है ”

उमेश चक्कर खाकर गिर पड़ा।

एक शादीशुदा आदमी ने अपनी कविता में कहा..

” मांग भरने की सजा.. कुछ इस तरह से पा रहा हूं,

कि मांगे पूरी करते-करते.. मांग कर खा रहा हूं ”

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