ये सुर्ख लब, ये रुखसार, और ये मदहोश नज़रें इतने कम फासलों पर तो मयखाने भी नहीं होते।

कौन तोलेगा हीरों में अब तुम्हारे आंसू सेराज़,

वो जो एक दर्द का ताजिर था दुकां छोड़ गया।

दिल से दिल की शायरी भाग-55

मेरे टूटने का ज़िम्मेदार मेरा जौहरी ही है,

उसी की ये ज़िद थी की अभी और तराशा जाए।

ये सुर्ख लब, ये रुखसार, और ये मदहोश नज़रें

इतने कम फासलों पर तो मयखाने भी नहीं होते।

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