यही तो अंदाज है जिंदगी जीने का, न खुद रहो उदास न दूसरों को उदास रहने दो.

हमारी गलतियों से कहीं टूट न जाना, हमारी शरारतों से कहीं रूठ न जाना.

1. हर रिश्तों में विश्वास रहने दो, जुबान पर हर वक्त मिठास रहने दो.

यही तो अंदाज है जिंदगी जीने का, न खुद रहो उदास न दूसरों को उदास रहने दो.

2. जाने क्यों आती है याद तुम्हारी, चुरा ले जाती है आँखों से नींद हमारी.

अब यही ख्याल रहता है सुबह-शाम, कब होगी तुमसे मुलाकात हमारी.

3. हमारी गलतियों से कहीं टूट न जाना, हमारी शरारतों से कहीं रूठ न जाना.

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