99% हिन्दू नहीं जानते होंगे, रावण की पत्नी मंदोदरी ने वि‍भीषण से विवाह क्यूँ किया था?

क्यों रावण की पत्नी मंदोदरी ने वि‍भीषण से विवाह किया था? आप भी जानिए

 
 

पहला भाग “ पुराणानुसार पांच स्त्रियां विवाहिता होने पर भी कन्याओं के समान ही पवित्र मानी गई है। अहिल्या, द्रौपदी, कुन्ती, तारा और मंदोदरी“ । पुराणों में इन्हें पंच कन्या कहा गया है और इनके वैवाहिक जीवन में कष्ट तो बहुत से आए , प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थितियाँ आई पर इन पाँचों ने नारायण श्री भगवान में अपनी श्रृद्धा कभी नहीं छोड़ी ।
दूसरा भाग “ इनमें में से तीन को रामावतार में प्रभु मिले और दो को कृष्णवतार में प्रभु मिले । अहिल्या का उद्धार राम ने किया , तारा का उद्धार बाली के बाद और मंदोदरी का उद्धार रावण के बाद । कृष्णावतार में कुंती और द्रौपदी की विषम परिस्थितियाँ आपको ज्ञात ही होगी ।

 
 

तीसरा भाग “ रावण के मरने का बाद मंदोदरी सती तो नहीं हुई न ? राजा दशरथ के मरने के बाद तीनों रानियाँ आग में नहीं कूदी न ? बाली के मरने के बाद तारा आग में नहीं कूदी न ? रामायण काल और महाभारत काल की लाखों कथाओं से यह स्पष्ट है की पति की मृत्यु के बाद स्त्री का यथोचित सम्मान होता था और जहाँ संभव हुआ वहाँ उसका पुनर्विवाह भी हुआ और यदि वह पहले रानी थी तो पुन: रानी बनी । मंदोदरी और तारा ही मुख्म रानियाँ बनी रहीं । मंदोदरी तो सदैव ही कन्या के समान पवित्र रही अत: विभीषण से उसका विवाह सर्वथा उचित ही था ।

 
 

और हाँ , “ कन्या “ का कोई पुल्लिंग शब्द नहीं है । यह पवित्र शब्द सनातन हिन्दु धर्म में अद्भुत है । कन्या का पर्यायवाची ही पवित्र है अत: सनातन धर्म में कन्या को हेय दृष्टि से देखता था वह नैरूक्त या पाणिनीय व्याकरण के अनुसार भी ठीक नहीं हो सकता । आज भी नवरात्रि में कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है और दान के रूप दंपति ईश्वर की दी हुई कृपा का ही दान करता है । कन्या , ईश्वर की कृपा है और पुत्र ,ईश्वर का फल । कृपा का स्थान फल से बहुत उपर है ।

Comments are closed.