बहुत कम लोग जानते होंगे आचार्य बालकृष्ण की बारे में ये बातें, जानकर यकीन कर पाना मुश्किल

योग गुरु बाबा रामदेव के साथ पतंजलि योगपीठ की कमान संभालने वाले आचार्य बालकृष्ण दुनिया के दस सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल हैं। 26 मई 2019 को उन्हें यूएनओ की संस्था यूएनएसडीजी यानी यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल ने विश्व के 10 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। उन्हें हाल ही में जेनेवा में यूएनएसडीजी हेल्थकेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था।
आचार्य बालकृष्ण का जन्म 4 अगस्त 1972 को हरिद्वार में हुआ था। वे मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं। इनकी माता का नाम सुमित्रा देवी और पिता का नाम जय बल्लभ है। उन्होंने संस्कृत में आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त की और इसका प्रचार-प्रसार का कार्य करते रहे हैं।

आचार्य बालकृष्ण के बारे में ये बातें बहुत ही कम लोग जानते हैं

 
 

उनका जन्म दिवस पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट से जुड़े लोग ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाते हैं। आचार्य बालकृष्ण के पास पतंजलि के 94 फीसदी शेयर हैं। वहीं, वे पतंजलि से एक भी रुपए की सैलरी नहीं लेते हैं।

 
 

आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेद केंद्र के माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेद पद्धति को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। बालकृष्ण ने आयुर्वेदिक औषधियों से सम्बंधित कई पुस्तकें भी लिखी हैं। बालकृष्ण ने रामदेव के साथ मिलकर हरिद्वार में आचार्यकुलम की स्थापना की। वह नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान से भी जुड़े हैं।
आचार्य बालकृष्ण को योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रशंसापत्र, प्रमाण पत्र व अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 23 अक्टूबर 2004 को एक योग शिविर के दौरान राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के द्वारा सम्मान दिया गया था।
अक्टूबर 2007 में नेपाल के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कैबिनेट मंत्रियों की उपस्थिति में योग, आयुर्वेद, संस्कृति और हिमालयी जड़ी बूटी के छिपे ज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए उनके योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। वर्ष 2012 में योग और औषधीय पौधों के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए श्री वीरंजनया फाउंडेशन द्वारा ‘सुजाना श्री’ पुरस्कार प्रदान किया गया था।

 
 

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